वॉन ने क्रिकेट को अलविदा कहा
एजेंसी Wednesday, July 01, 2009 11:24 [IST]  

एजबस्टन. vaughan इंग्लैंड टीम के सफल टेस्ट कप्तान माइकल वान ने पेशेवर क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की। खराब फॉर्म, घुटने की चोट व समय की मांग को देखते हुए उन्होंने नई पीढ़ी के लिए अपना बल्ला टांग देना ही उचित समझा। वान ने मंगलवार को संन्यास की घोषणा की।

उन्होंने कहा कि वे पेशेवर क्रिकेट के किसी भी फॉर्मेट में नहीं खेलेंगे। यॉर्कशायर के 34 साल के इस मेधावी कप्तान ने 51 में से 26 टेस्ट में जीत दर्ज की थी। 2005 में वान के नेतृत्व में इंग्लैंड ने 18 साल बाद एशेज सीरीज जीतने में कामयाबी हासिल की थी।इसके अलावा उसी साल इंग्लैंड ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज जीतने का गौरव हासिल किया था।

अपने टीम के खिलाडियों, मैनेजरों , कोचों, मीडिया और प्रशंसकों के प्रति तहेदिल से आभार व्यक्त करता हूं। जिन्होंने मेरे करिअर को ऊंचाई प्रदान करने में मदद की। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान ने कहा मैं एंड्रयू स्ट्रास और मौजूदा इंग्लैंड टीम को एशेज सीरीज में शानदार प्रदर्शन करने की शुभकामना देता हूं।

स्ट्रॉस की तारीफ : एंड्रयू स्ट्रॉस की तारीफ करते हुए वान ने कहा कि उनमें नेतृत्व की क्षमता है और उम्मीद की जानी चाहिए कि इंग्लैंड इस बार भी एशेज सीरीज जीतेग। लगातार 16 साल तक खेलते हुए अब मैंने युवाओं के लिए स्थान खाली करना उचित समझा।

मुझे पता है कि यह टीम वर्ष २क्क्५ केइतिहास को दोहराने के लिए बेताब है। मेरी शुभकामनाएं पूरी टीम के साथ है। वान ने कहा मेरे लिए २क्क्५ में एशेज सीरीज जीतना सबसे बड़ी सफलता थी। मेरे करिअर का वह सबसे ऊंचा मुकाम था। उस दिन मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। एशेज काफी प्रतिष्ठित श्रृंखला होती हैऔर मेरी कप्तानी में टीम ने इसे जीता था । गौरतलब है कि वान ने २क्क्३ में इंग्लैंड की कप्तानी संभाली थी और वह २क्क्८ तक टीम के कप्तान रहे थे। उन्होंने अपनी कप्तानी में इंग्लैंड ५१ टेस्ट मैच खेले।

जिसमें 26 टेस्ट जीते थे, 14 ड्रा रहे जबकि 11 में इंग्लैंड को हार का सामना करना पड़ा था । वान की बेहतरीन कप्तानी ने उन्हें इंग्लैंड का सबसे सफल कप्तान होने का तमगा भी दिलाया। वान ने वर्ष 2002-03 के आस्ट्रेलिया दौरे में शानदार प्रदर्शन किया था और उन्होंने तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला में शानदार तीन शतकों समेत रिकार्ड 633 रन बनाए थे । वान के लिए वर्ष 2004 शानदार रहा था । इस दौरान उन्होंने टीम को कई सफलता दिलाई ।

इसके अलावा वान ने नासिर हुसैन के संन्यास लेने के बाद वनडे टीम की भी कमान संभाली। वान के लिए सबसे स्वर्णिम लम्हा 2005 में आया। उन्होंने इस वर्ष एशेज में आस्ट्रेलिया की दिग्गज टीम को परास्त किया था। लेकिन उसके बाद से वान अपने पूरे करिअर में चोट और खराब प्रदर्शन से भी परेशान रहे। घुटने की चोट के कारण वान काफी समय तक परेशान रहे।

इसबार के एशेज सीरीज के लिए टीम में जगह बनाने के लिए वान ने काउंटी क्रिकेट भी खेली। लेकिन वह यहां बुरी तरह असफल रहे और सात काउंटी चैंपियनशिप मैचों में केवल 147 रन ही बना सके। वान के लगातार खराब प्रदर्शन के कारण चयनकर्ताओं ने उन्हें एशेज के लिए चुनी गई प्री एशेज टीम में शामिल नहीं किया था। इस बीच रवि बोपारा ने वान की जगह तीसरे नंबर पर खेलते हुए वेस्टइंडीज के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया जिसके कारण भी वान का दावा कमजोर हुआ।

वान ने 82 टेस्ट मैचों में 41.44 के औसत से 5719 रन बनाए हैं। जिसमें उनके 18 शतक शामिल हैं । टेस्ट में उनका सर्वŸोष्ठ प्रदर्शन भारत के खिलाफ 197 रन हैं। इसके अलावा वान ने 86 वनडे मैचों में 1982 रन बनाए थे। उनका औसत 27.14 का रहा और इसमें उनके 16 अर्धशतक शामिल हैं।

वान का प्रदर्शन

टेस्ट ---- रन ---- शतक ----अर्धशतक--- औसत --- विकेट

82 ---- 5719 --- 18 ---- 18 --- 41.44---- 6

वनडे ---- रन ---- शतक ----अर्धशतक--- औसत ---- विकेट

86 ---- 1982---- 0 ---- 16 ---- 27.15---- 16

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