
नई दिल्ली। मंगलवार को लिब्राहन आयोग ने 17 साल की लंबी जांच के बाद अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंपी। रिपोर्ट के आते ही दिल्ली से लेकर देशभर के राजनीतिक महकमों में चर्चा और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। रिपोर्ट में विहिप और भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं पर उंगली उठाई गई है। जिसके बाद खुद को निर्दोष बताने और दूसरे पर आरोप लगाना राजनीतिक पार्टियों का प्रमुख काम बन गया।
बाबरी मस्जिद कांड की जांच के लिए बनाए गए लिब्राहन आयोग को 48 बार एक्सटेंशन मिल चुका है। जांच रिपोर्ट को सौंपने में 17 साल लगे और इस देरी का कारण आयोग गवाहों के सहयोग न करने को बता रहा है। अब सभी को इंतजार है कि 17 साल में पूरी हुई रिपोर्ट में योग ने क्या सिफारिशें की हैं और उन पर क्या कार्रवाई होगी और कब तक होगी।
आयोग ने अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंपी है, वहीं यह रिपोर्ट गृहमंत्रालय को भी दी गई है।
भाजपा ने रिपोर्ट सौंपने के समय पर आपत्ती जताई है।
इतिहास पर नजर
बाबरी मस्जिद सुन्नी मुसलमान राजा बाबर की है। इसी के पास एक चबूतरे को राम जन्मस्थान माना जाता है। इस स्थान पर 1949 में राम सीता लक्ष्मण की मूर्तियां रख दी गई, कहा गया कि यह मूर्तियां गर्भगृह से निकली है। बीजेपी और सहयोगी दल इस स्थान पर राम मंदिर बनाने को लेकर लंबे समय से प्रयास करते रहे हैं। 
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