राजकोट-सूरत। पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तोयबा द्वारा भातर में बड़े आतंकी हमले की साजिश की जानकारी गुप्तचर विभाग को मिली है। इसके मद्देनजर गुजरात के समुद्री तटों की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के निर्देश दिए गए हैं।
बुधवार को एनएसजी हब का शुभारंभ करते हुए गृहमंत्री चिदंबरम ने भी देश के पश्चिमी तट की ओर से भारत को खतरा होने की पुष्टी की है।
दिव्य भास्कर की टीम ने इन व्यवस्थाओं का जायजा लिया, तो पता चला कि इस सुरक्षा-व्यवस्था मे कई तरह की खामियां हैं। जिनका लाभ आतंकी संगठन उठा सकते हैं। कहीं कस्टम की बोट कीचड़ में फंसी है, तो कहीं पेट्रोलिंग ही बंद कर दी गई है। दूसरी ओर समुद्री तट की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार ने 392.47 करोड़ की योजना केंद्र सरकार को भेजी थी, किंतु केंद्र ने इसके लिए मात्र 58.47 करोड़ रुपए ही मंजूर किए हैं।
भास्कर टीम ने देखा कि सौराष्ट्र-कच्छ के 1100 कि.मी. से अधिक समुद्री तट की सुरक्षा के लिए जो संसाधन जुटाए गए हैं, वे बहुत ही कम हैं। समुद्री किनारों की सुरक्षा एकमात्र कोस्ट गार्ड पर ही है, जो चाहकर भी पूरे क्षेत्र की चौकसी नहीं कर सकते।
टीम जब महाराष्ट्र सीमा पर स्थित देहरी गोवाड़ा तक के तटों पर किसी प्रकार की सुरक्षा-व्यवस्था दिखाई नहीं दी। वलसाड़ के तटों पर भी सुरक्षा-व्यवस्था पर कई खामियां दिखाई दीं। उधर नवसारी जिले के दांती से मेंघरभाट तक 51 कि.मी. के क्षेत्र में सुरक्षा के नाम पर किसी प्रकार की हलचल नहीं दिखाई दी।
सूरत के समुद्री पट्टी पर शुरू की गई पेट्रोलिंग बंद
कुछ माह पहले तक सूरत की समुद्री पट्टी पर पेट्रोलिंग की जाती थी, पर अब उसे बंद कर दिया गया है। अभी यह इलाका सुरक्षा की दृष्टि से पूरी तरह से खुला पड़ा है। सूरत शहर से गुजरने वाली तापी नदी अरब सागर में मिलती है। इस रास्ते से भी आतंकी शहर में आसानी से घुस सकते हैं। उधर हजीरा पट्टी पर रिलायंस, एस्सार, ओएनजीसी जैसी कंपनियों के लिए यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है, लेकिन यहां सुरक्षा की कोई चुस्त व्यवस्था नहीं है।
केंद्र द्वारा उपेक्षा
समुद्री किनारों की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार ने 392.47 करोड़ योजना केंद्र सरकार को भेजी थी, किंतु केंद्र ने इसके लिए मात्र 58.47 करोड़ रुपए ही मंजूर किए हैं। मुंबई पर हुए हमले के बाद समुद्री किनारों की सुरक्षा अतिमहत्वपूर्ण हो गई है। इसे देखते हुए केंद्र द्वारा दी जाने वाली सहायता बहुत ही कम है।
नवसारी जिले का 51 कि.मी. किनारे पर कोई सुरक्षा नहीं
नवसारी जिले के दांती से मेघरभाट तक 51 कि.मी.क्षेत्र में किसी प्रकार की हलचल नहीं देखी गई। यह किनारा वलसाड़ कस्टम के अधीन है। इस किनारे पर कस्टम, नेवी, कोस्ट गार्ड या स्थानीय पुलिस द्वारा किसी प्रकार की पेट्रोलिंग नहीं की जा रही है। कस्टम के पास मेरीन स्टाफ और खलासी भी नहीं हैं। थोड़े-बहुत शस्त्र हैं, पर उसकी देखभाल के लिए आर्मर नहीं हैं।
कस्टम की बोट कीचड़ में फंसी
सरकार के इस एलर्ट के बीच मंगलवार को पेट्रोलिंग के लिए दी जाने वाली कस्टम की दोनों बोट वलसाड़ के मगोद पहाड़ी के पास कीचड़ में फंसी मिली।
महाराष्ट्र सीमा पर भी कोई चौकसी नहीं
1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोट के लिए इज्जु शेख और उसके साथियों द्वारा आरडीएक्स उतारने के लिए उमरगांव के समुद्री तट का इस्तेमाल किया था। भास्कर की टीम जब दमनके करीब के कालच से लेकर महाराष्ट्र सीमा के देहरी गोवाड़ा तक की किनारों का निरीक्षण किया गया, तो वहां किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था नहीं देखी गई। इस एकांत तट का लाभ लेकर आतंकी अपने इरादों पर कामयाब हो सकते हैं।
वलसाड़ जिले के किनारों पर किसी प्रकार की कोई आतंकी गतिविधि नहीं पाई गई, इसके बाद भी हमने अपनी तरफ से पूरी सुरक्षा-व्यवस्था को और अधिक चुस्त बनाया है। -आर.बी. देवे. कलेक्टरसमुद्री किनारों की पेट्रोलिंग सघन बनाने की सूचना दे दी गई है। मछुआरों को भी सचेत कर दिया गया है।- डी.जी. पटेल. डीएसपीदमन कोस्टगार्ड कोडोनियर विमानों और चेतक हेलीकाप्टरों को सुरक्षा के काम में लगा दिया गया है।- एस.डी. भनोट. डीआईजी कोस्टगार्डपुलिस स्टेशन द्वारा किराए की एक बोटसे नाइट पेट्रोलिंग की जा रही है।- आर.पी. मीणा. सीओपी