नई दिल्ली. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की फैकल्टी में आरक्षण लागू करने के प्रस्ताव पर मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने भी मुहर लगा दी है। आईआईटी निदेशकों ने केंद्र के इस प्रस्ताव का जबर्दस्त विरोध करते हुए प्रधानमंत्री के समक्ष अपना पक्ष भी रखा था।
बुधवार को यहां आईआईटी निदेशकों की एक कार्यशाला में सिब्बल ने यह साफ कर दिया कि इन प्रतिष्ठित संस्थानों की फैकल्टी में आरक्षण लागू होगा। इसके तहत आईआईटी में विज्ञान व इंजीनियरिंग विषयों के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर व मानविकी समेत अन्य विषयों की फैकल्टी में एससी, एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने की बात कही गई है।
केंद्र ने पिछले साल जून में सभी आईआईटी निदेशकों को पत्र लिखकर फैकल्टी में आरक्षण लागू करने को कहा था। सरकार ने कार्मिक मंत्रालय की ओर से राज्यसभा में पोस्ट एंड सर्विसेज बिल 2008 भी पेश किया था, जिसमें राष्ट्रीय महत्व के 47 उच्च शिक्षण संस्थानों को फैकल्टी आरक्षण से मुक्त कराने का प्रावधान था। बाद में सरकार के यू-टर्न लेने के बाद से यह विधेयक अब तक पारित नहीं हो सका है।
बैठक में सिब्बल ने आईआईटी को मेडिकल और कानून के क्षेत्र में भी विस्तार करने की सलाह दी। सिब्बल ने कहा कि आईआईटी संस्थानों को मेडिसिन, कानून, सामाजिक विज्ञान और यहां तक कि साहित्य की शिक्षा भी देनी चाहिए।