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स्मारकों, पार्को को पर्यटन स्थल बनाएगी माया सरकार
विजय उपाध्याय Thursday, July 02, 2009 00:27 [IST]  

लखनऊ. उत्तरप्रदेश सरकार यहां अरबों रुपए खर्च कर बनाए जा रहे स्मारकों और पार्को को अब पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करेगी। सैलानियों को टिकट बेचकर जो पैसा आएगा, उससे राज्य के गांवों व दलित बस्तियों में सड़कें बनाई जाएंगी। यह घोषणा मुख्यमंत्री मायावती ने बुधवार को यहां की।

भाजपा ने मायावती की इस योजना को हास्यास्पद बताया है। प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता हृदयनारायण दीक्षित ने कहा कि बसपा नेताओं और अपनी प्रतिमाओं पर करोड़ों रुपए खर्च करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद राज्य सरकार ने इसे जायज ठहराने के लिए ‘हास्यास्पद स्पष्टीकरण’ का सहारा लिया है।

मायावती ने प्रतिमाओं और पार्को पर खर्च के मामले में अपनी सफाई में कहा कि यह दिल्ली के राजघाट पर स्थित समाधियों की जमीन की कीमत के मुकाबले नाममात्र है। उन्होंने इस मामले पर उठे विवाद को जातिवादी मानसिकता के लोगों की करतूत करार दिया। इन प्रस्तावित पर्यटन स्थलों पर पहले छह माह सैलानियों को मुफ्त प्रवेश दिया जाएगा।

प्रतिमाओं की ऊंचाई के खिलाफ याचिका

मायावती सरकार द्वारा यहां स्थापित प्रतिमाओं की ऊंचाई को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में प्रतिमाओं की ऊंचाई को निर्धारित आकार से अधिक बताया गया है। कोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार से सफाई मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी। रिटायर्ड वकील सत्यवीर सिंह यादव की याचिका में कहा गया है कि 2005 में हाईकोर्ट ने इससे पहले प्रतिमाओं की ऊंचाई तीन फीट से अधिक न रखने को कहा था, लेकिन माया सरकार द्वारा स्थापित प्रतिमाएं इससे कहीं अधिक ऊंची हैं।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की टेढ़ी नजर

उत्तरप्रदेश में बसपा नेताओं और मायावती की प्रतिमाओं की स्थापना के करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट पर अब केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने टेढ़ी नजर डाली है। स्मारकों और पार्र्को के इस प्रोजेक्ट को ‘दलित मेमोरियल’ कहा जा रहा है।

पर्यावरण मंत्रालय इस बात की पड़ताल करेगा कि राज्य सरकार ने इन प्रतिमाओं की स्थापना के लिए अनुमति ली है या नहीं। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने मंगलवार को कहा था कि पत्थरों और कांक्रीट से बनने वाले ढांचों को अनुमति देने से पहले उनका पर्यावरण पर प्रभाव देखा जाएगा। उत्तरप्रदेश सरकार ने अपनी परियोजना के लिए पर्यावरण की कोई चिंता नहीं की है और जंगलों व ग्रीन बेल्ट पर स्मारक खड़े किए गए हैं। माना जा रहा है कि इसके कारण माया सरकार को वैधानिक समस्याओं से भी जूझना पड़ सकता है।

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