
नई दिल्ली। गुरूवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने समलैंगिकता के मुद्दे पर ऐतिहासिक फैसला देते हुए इसे गैरअपराधिक करार दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरूवार सुबह यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने धारा 377 को गलत करार देते हुए इसे अनुच्छेद 21 का उल्लंघन माना है। धारा 377 में समलैंगिकता को आपराधिक बताया गया है। वहीं अनुच्छेद 21 मौलिक आधिकारों की बात कहता है।
कोर्ट के अनुसार 18 साल से बड़ी उम्र के लोगों के बीच समलैंगिक संबंध आपराध की श्रेणी में नहीं आएंगे। कोर्ट के अनुसार स्त्री का स्त्री से या पुरूष का पुरूष से सहमति से संबंध बनाना अपराध नहीं है। दिल्ली हाई कोर्ट के अनुसार धारा 377 वैध नहीं है और यह मौलिक अधिकार का हनन है।
गे संबंध को कानून अपराध नहीं माना गया है। 1861 में अंग्रेजो ने यह कानून बनाया था। फिलहाल समलैंगिकता के कानून को गैरआपराधिक माना है लेकिन इसे कानूनी मान्यता देने का काम सरकार करेगी।
समलैंगिको के हित के लिए लंबे समय से काम कर रही बॉलीवुड अभिनेत्री सेलिना जेटली के अनुसार कोर्ट का यह फैसला काफी अहम है।
अपने अपने तर्क -
इस कानून का विरोध करने वालों के अनुसार इससे समाज में व्याभिचार फैलता है और समलैंगिकता से कई तरह की बीमारियां होने का खतरा भी होता है।
वहीं समलैंगिकता को कानूनी तौर पर मान्यता देनेवालों का कहना है कि इसे अगर कानूनी मान्यता मिल जाए तो समलैंगिकों को उनका हक मिलेगा और बेवजह पैसा उगाही और समलैंगिकों को डराने धमकाने की घटनाओं में कमी आएगी।
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