अहमदाबाद. शहर के आसाराम आश्रम के गुरुकुल में पढ़ने वाले दो छात्रों की संदिग्ध मौत के एक साल बाद गुजरात सरकार ने खुलासा किया है कि आश्रम में तंत्र-मंत्र की क्रियाएं होती थीं। गुरुवार को हाईकोर्ट में पेश किए गए हलफनामे में कहा गया है कि आश्रम के सेवादारों ने इन गतिविधियों की जानकारी होने के बावजूद असलियत छिपाने की कोशिश की। यह खुलासा तीन सेवादारों के 22 जनवरी को कराए गए लाई डिटेक्शन टेस्ट में हुआ है। गौरतलब है कि पिछले साल तीन जुलाई को दीपेश व अभिषेक आश्रम के गुरुकुल से लापता हो गए थे। बाद में दोनों के शव मिलने से समूचे क्षेत्र सनसनी फैल गई थी।
हलफनामे के मुताबिक आश्रम में तंत्र-मंत्र की गतिविधियां होने का खुलासा सेवादारों उदय सांघाणी ,मनिकेतन पात्रा व विकास खेमका के लाई डिटेक्शन टेस्ट में हुआ है। दोनों छात्रों के पिता शांतिलाल बाघेला तथा प्रफुल्ल वाघेला की ओर से इस मामले की जांच सीबीआई से कराने संबंधी याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई है। इसकी सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार को हलफनामा पेश करने के निर्देश दिए थे। गुरुवार को पीड़ित पक्ष के वकील एस.एच.अय्यर ने कहा कि एक साल बीतने के बावजूद मौत का राज नहीं खुल सका है। ऐसे में कोर्ट को मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश देना चाहिए।
राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि संदिग्ध मौत की जांच में कोताही नहीं बरती जा रही है। सरकार ने जस्टिस डी.के. त्रिवेदी जांच आयोग का गठन भी किया है। उधर, आसाराम आश्रम की ओर से पेश हलफनामे में कहा गया है कि जांच के काम में आश्रम की ओर से पूर्ण सहयोग के कारण सीबीआई जांच कराने की कोई जरूरत नहीं है।