भोपाल. मानसून की मेहरबानी से कोलांस नदी अब फिर बहने लगी। ये मेहरबानी बरकरार रही तो बड़ी झील का पेट पानी से लबालब भरेगा। बीते नौ महीने से ये सूखी थी। बीते चार महीनों में तो इसकी सतह आसमानी तपिश से जगह-जगह से चटक गई थी। गुरुवार को नदी में पानी बहता नजर आने से अफसरों ने राहत की सांस ली। यहां कोलांस और उलझावन नदी के चौड़ीकरण और गहरीकरण का अब कुछ ही काम शेष बचा है।
सीहोर तरफ हुई वर्षा का पानी आने से ये अब कोलांस बहने लगी है। अभी इसका पानी वेग के रूप में बड़ी झील के अंदर नहीं पहुंचा है लेकिन इसने जलग्रहण क्षेत्र में अपनी आमद दर्ज करा दी है। बुधवार रात को हुई जैसी बारिश का लाभ कोलांस को लगातार चाहिए ताकि ये बड़ी झील में अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज करा सके।
अल्पवर्षा के कारण बड़ी झील का पेट खाली रहने पर प्रशासन ने बीते पांच माह में इसके चौड़ीकरण और गहरीकरण का काम किया। इसके जीवनकाल में ये पहला अवसर है कि नदी के ऊपर जेसीबी मशीन चली तो डम्पर दौड़े। अब हालत ये है कि कोलांस के कोलूखेड़ी, जमुनिया, फंदा कला, ईंटखेड़ी छाप, मुंगालिया छाप, शाइस्ता खेड़ी, बोरखेड़ी, कौडिया, टीलाखेड़ी, नांदनी, मूंडला, कलखेड़ा बड़झिरी, सरवर में कोलांस परिस्थिति अनुसार तीन मीटर गहरा और तीस मीटर तक चौड़ा किया है। इससे आकर मिलने वाले बीस गांव के बरसाती नालों के ग्रेबियन स्ट्रक्चर को भी सुधारा गया है।
झील की खास बात
वैज्ञानिकों के अनुसार झील के नीचे की चट्टानें डेक्कन ट्रैप बेसाल्ट प्रकार की हैं, जो ज्वालामुखी के लावा बहने और तुरंत ठंडा होने के कारण बनी हैं।