भोपाल. आर्थिक क्षेत्र में बढ़ोतरी की विभिन्न कसौटियों पर पीछे रहने के साथ ही मानव विकास के सूचकांकों में मध्यप्रदेश देश के दूसरे कई राज्यों से बहुत पीछे है। मध्यप्रदेश की शुद्ध घरेलू उत्पाद वृद्धि दर वर्तमान कीमतों पर 2007-08 में 8.84 फीसदी रही है, जबकि राष्ट्रीय औसत 14.30 फीसदी है। बिहार, उत्तरप्रदेश सहित 23 राज्य इस मामले में मप्र से आगे है। इसी तरह मौजूदा कीमतों पर प्रति व्यक्ति आय वृद्धि दर 6.97 फीसदी रही जो राष्ट्रीय औसत (12.7 फीसदी) से तो काफी कम है। प्रदेश की यह तस्वीर गुरुवार को लोकसभा में पेश देश के आर्थिक सर्वे 2008-09 ने दिखाई है। इसके अनुसार आर्थिक प्रगति के कई मापदंडों पर मध्यप्रदेश काफी पीछे है।
प्रतिव्यक्ति आय में 26वें स्थान पर
प्रचलित दर पर प्रति व्यक्ति आय 18051 रुपए के साथ मप्र २५ राज्यों से पीछे है। चंडीगढ़ 110676 रुपए के साथ पहले नंबर पर है। पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में यह 28955५ रुपए है। 2007-08 में देश के कुल निर्यात में मप्र का हिस्सा मात्र 1.80 फीसदी रहा। 15 मुख्य निर्यातक राज्यों में प्रदेश 12वें नंबर पर है। इसमें 27.50 प्रतिशत भागीदारी के साथ महाराष्ट्र पहले, दूसरे व तीसरे पर क्रमश: गुजरात (21.3 प्रतिशत) व तमिलनाडु (9.1 प्रतिशत) है।
सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) में प्रदेश में 4856 करोड़ के 25 प्रोजेक्ट अनुबंधित हैं। 17700 करोड़ के पीपीपी प्रोजेक्ट के साथ गुजरात पहले नंबर पर है। वर्ष 2007 में शिशु मृत्यु दर मप्र में प्रति एक हजार जन्म पर 72 है, जो देश में सर्वाधिक है। 28.50 की जन्मदर के साथ मप्र, उत्तरप्रदेश और बिहार के बाद तीसरे नंबर पर है, वहीं 8.7 की मृत्युदर के साथ उड़ीसा के बाद दूसरे स्थान पर है। जन्म के समय जीवन प्रत्याशा 58 है जो कि सभी राज्यों में सबसे कम है। स्कूलों में प्रवेश के मामले जरूर मप्र की स्थिति दूसरे कुछ राज्या से ठीक है। कक्षा पहली से आठवीं तक 130.07 के नामांकन अनुपात के साथ मप्र देश में चौथे स्थान पर है।