चंडीगढ़. वायरलेस ब्रॉडबैंड इंटरनेट ने नेट सर्फिग की पूरी दुनिया ही बदल डाली है। इंटरनेट कनेक्शन से लेकर इंस्टालेशन तक और यूजर नेम से लेकर पासवर्ड के पंगे को पीछे छोड़ते हुए अब सीधे प्लगइन इंटरनेट का दौर आ गया है। शुरुआत रिलायंस कम्युनिकेशन ने की है, जिसने अपना नया ब्रॉडबैंड इंटरनेट यूएसबी ड्राइव में लॉन्च किया है।
शुरुआती दाम 3500 रुपए है। आरकॉम के इस नए इंटरनेट प्रोडक्ट को किसी भी पीसी या लैपटॉप में प्लगइन करते ही इंटरनेट की सुविधा मिल जाएगी। इस नए प्रोडक्ट से इंटरनेट कनेक्ट करने के लिए अलग से सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने की जरूरत भी नहीं रहती। ऐसे में पूरा मामला एकदम आसान हो जाता है।
रिलायंस कम्युनिकेशन के प्रवक्ता रूपेश सिंह के अनुसार आरकॉम के वायरलेस इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या 10 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। वायरलेस ब्रॉडबैंड से यह संख्या और भी तेजी से बढ़ रही है।
रिलायंस के बाद टाटा इंडीकॉम भी अपना ब्रॉडबैंड इंटरनेट लॉन्च करने की तैयारी में है। टाटा इंडिकॉम के हेड, मार्केटिंग कम्युनिकेशन दानिश खान के अनुसार दिल्ली में वायरलेस ब्रॉडबैंड लॉन्च हो चुकी है और अगले दो-तीन सप्ताह में चंडीगढ़ में भी यह सर्विस उपलब्ध होगी। टाटा इंडिकॉम ने फैटोन ब्रांड से वायरलेस ब्रॉडबैंड प्लग इन लॉन्च किया है। इसमें 3.1 एमबीपीएस की स्पीड मिलती है। यूएसबी मॉडम में इसका मूल्य भी 3500 रुपए ही है। बाकी टैरिफ प्लान उपभोक्ता अपनी जरूरत के अनुसार चुन सकते हैं।
एयरटेल और आइडिया भी मैदान में
एयरटेल और आइडिया भी डाटाकार्ड से वायरलेस इंटरनेट की सुविधा दे रहे हैं पर उनका बेस जीएसएम होने के कारण उनकी स्पीड़ ब्रॉडबैंड के मुकाबले काफी कम है। आरकॉम और टाटा इंडिकॉम ने ब्रॉडबैंड इंटरनेट सीडीएमए बेस पर दिया है, जिससे वे तेज इंटरनेट सुविधा देने में सफल रहे हैं।
बीएसएनएल ने मैदान छोड़ा खाली
बीएसएनएल ने भी वायरलेस ब्रॉडबैंड के लिए यूएसबी मॉडम बाजार में उतारा है लेकिन मार्केटिंग की कमी के चलते बीएसएनएल की सर्विस के बारे में रिस्पांस कम आ रहा है।
लैपटॉप की बढ़ती बिक्री से बढ़ी मांग
स्टूडेंट से लेकर बिजनेस एग्जीक्यूटिव्स में लैपटॉप की बढ़ती जरूरत से वायरलेस इंटरनेट की मांग भी लगातार बढ़ी है। अभी तक 144 केबीपीएस के डॉटाकार्ड ही उनकी जरूरत पूरा कर रहे थे लेकिन ब्रॉडबैंड यूएसबी ने पूरा बाजार ही बदल दिया है। अब ब्रॉडबैंड इंटरनेट के लिए वायर कनेक्शन की जरूरत नहीं रह गई है जो एक मुख्य समस्या थी। जिन क्षेत्रों में टेलीकॉम कंपनियों के केबल नहीं थे, वहां उपभोक्ताओं को ब्रॉडबैंड सर्विस मिल ही नहीं पाती है। ऐसे उपभोक्ताओं के लिए यह एक बढ़िया विकल्प है।