चंडीगढ़. पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ोतरी ने पहला झटका दे दिया है। शहर में नॉन एसी टैक्सियां चलाने के लिए अब नए सिरे से टेंडर मांगे जाएंगे। वजह है कंपनी की ओर से किराए में बढ़ोतरी की मांग। प्रशासन का कहना है कि पेट्रोल और डीजल महंगा होने से पुराने रेट तर्कसंगत नहीं। लिहाजा रेट पर भी विचार किया जा रहा है।
इसी के साथ 24 घंटे एलपीजी रेडियो ऑटो चलाने के लिए भी दोबारा से टेंडर मांगे जा रहे हैं। हालांकि अभी एलपीजी के रेट नहीं बढ़े हैं, लेकिन ऑटो वालों को भी लगता है कि प्रशासन ने कम रेट तय किए हैं। आने वाले दिनों में अगर एलपीजी भी महंगी होती है तो एक दम से ऑटो के रेट बढ़ा पाना संभव नहीं होगा।
प्रशासन ने पहले यह दावा किया था कि जुलाई के पहले हफ्ते से एलपीजी रेडियो ऑटो और नॉन एसी टैक्सी सर्विस शुरू कर दी जाएगी, लेकिन रेट के मामले को लेकर बात नहीं बन पाई और आखिर कार टेंडर ही रद्द कर दिए गए। नॉन एसी टैक्सी सर्विस शुरू करने का प्रस्ताव पिछले दो सालों से लटक रहा है।
इसके लिए तीन बार टेंडर मंगवाए जा चुके हैं, लेकिन हर बार कुछ न कुछ ऐसा हुआ कि टैक्सी सड़क पर नजर नहीं आई। इस बार चार कंपनियों ने टैक्सी सर्विस शुरू करने में दिलचस्पी दिखाई थी। इनमें से तीन कंपनियों का एक ही मालिक था। लिहाजा चार में से केवल एक ही कंपनी ने सिक्योरिटी जमा करवाते हुए टैक्सी चलाने की कोशिश की जबकि बाकी तीन प्रति किलोमीटर किराया 8 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये करने की मांग को लेकर उलझी रहीं।
क्या है रेडियो ऑटो
प्रशासन की योजना के तहत ये ऑटो रिक्शा जीएसएम/सीडीएमए/लैंडलाइन नेटवर्क के साथ जीपीएस से युक्त होंगे। ये ऑटो रिक्शा एलपीजी/सीएनजी से चलेंगे। इनमें इलेक्ट्रॉनिक इंडीकेटर भी होगा, जो यह दिखाएगा कि ऑटो पहले से ही भरा है या खाली है। प्रशासन ने इन रेडियो ऑटो के लिए पहले किमी. का 10 रुपये व इसके बाद 5 रूपये प्रति किलोमीटर किराया तय किया था। इस सर्विस के लिए तीन कंपनियों को चुना गया था। यह कंपनियां प्रति किलोमीटर किराया पांच रुपये से बढ़ाकर सात रुपये करने की मांग कर रही थीं।
एक महीने में चला देंगे
होम-कम-ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी राम निवास के मुताबिक नॉन एसी टैक्सी और रेडियो ऑटो सर्विस के लिए चुनी गई कंपनियां पहले ही रेट बढ़ाने की मांग कर रही थीं। प्रशासन ने आवेदनों को खारिज कर नए सिरे से आवेदन मांगने का फैसला किया है। प्रति किमी. किराया भी नए सिरे से तय किया जाएगा। दोबारा आवेदन मांगने से वह कंपनियां भी आवेदन कर सकेंगी जो किराया कम होने के कारण पीछे हट गई थीं। प्रशासन हर संभव कोशिश करेगा कि एक माह के अंदर शहर में दोनों सर्विसेज़ चालू हो जाएं।