इंदौर. अपनी मजबूत कदकाठी, कम खानपान और मेहनत में हमेशा पहचानी जाने वाली गाय की मालवी नस्ल को हरियाणा की रेडसिंडी, दक्षिण की अमृत महल और गुजरात की गिर नस्ल के समकक्ष लाने के लिए एक महाअभियान छेड़ा गया। इसके लिए इंदौर के नजदीक माचला गांव को मुख्य केंद्र बनाकर शोध व प्रयोग भी शुरू कर दिए गए हैं।
गोसेवा के क्षेत्र में काम कर रही कई बड़ी संस्थाओं की भी इस अभियान में सहभागिता रहेगी। गो संरक्षण व गो उन्नयन के क्षेत्र में काम करने वाली मुंबई की संस्था गो विज्ञान भारती की अगुआई में शुरू हुए इस अभियान में करीब 30 लाख संख्या वाली मालवी नस्ल के बेसिक जीन को बचाकर गायों के दूध देने की क्षमता बढ़ाने, बैलों के खेती में ज्यादा उपयोग के साथ ही वैकल्पिक उपयोग के उपाय ढूंढ़ने का भी मुख्य ध्येय रखा गया है।
नतीजे का विश्लेषण चल रहा है
अभियान से जुड़े सवरेदयी नरेंद्र दुबे कहते हैं पारपरकर से क्रास करवाने का प्रयोग हम कर चुके हैं जो नतीजा आया है वह संतोषजनक है। अब उसका विश्लेषण किया जा रहा है। इसके अलावा उनके खानपान खासकर फीडिंग पर भी कुछ प्रयोग किया जा रहा है। गायों पर काम करने वाले विशेषज्ञों से भी सलाह मशविरा कर अच्छे नतीजे लाने की कोशिश हो रही है।
आज माचला में बड़ा आयोजन
मालवी नस्ल के उन्नयन के साथ ही गो विज्ञान तथा गो सत्याग्रह पर चर्चा के लिए शुक्रवार को माचला में एक कार्यशाला होगी। सुबह नौ से शाम पांच बजे तक चलने वाली इस कार्यशाला में गो संरक्षण व उन्नयन से जुड़े देश के अनेक दिग्गज समाजसेवी शिरकत करेंगे।