जयपुर. आइंदा रिश्वत नहीं लूंगा, मेरी नौकरी बचा दो। यह गुहार गुरुवार शाम बनीपार्क स्थित नगर निगम कोर्ट मजिस्ट्रेट के निजी सहायक ने रंगे हाथ 11 सौ रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार करने के बाद रोते हुए हाथ जोड़ व पैर पकड़कर की।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के महानिरीक्षक सुधाकर जौहरी ने बताया कि विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र निवासी जगदीश प्रसाद शर्मा ने शिकायत की थी कि विश्वकर्मा रोड नंबर पांच पर उसका भाई शर्मा ढाबा चलाता है। बनीपार्क दमकल कार्यालय के पीछे अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम, नगर निगम में 6 जून, 2006 को निगम द्वारा किए चालान का वाद चल रहा है। इसे रफा-दफा करने की एवज में न्यायालय का निजी सहायक राजेश कुमार अग्रवाल 11 सौ रुपए रिश्वत की मांग कर रहा है।
शिकायत जांच में सही पाए जाने पर उपाधीक्षक जयकिशन शर्मा को ट्रेप की जिम्मेदारी दी गई। जयकिशन ने दोपहर को जगदीश शर्मा की राजेश से मोबाइल पर बात कराई तो उसने शाम साढ़े चार बजे कोर्ट परिसर में रुपए लेकर आने के लिए कहा। राजेश को कोर्ट बरामदे में जैसे ही जगदीश से राशि मिली तो ब्यूरो के अधिकारियों ने उसे दबोच लिया।
एसीबी के अधिकारियों ने उसे निगम कोर्ट के मजिस्ट्रेट के.सी. अटवासिया के यहां पेश किया तो वहां गलती होने, आइंदा पैसे नहीं लेने का विश्वास दिलाते हुए नौकरी बचाने की गुहार करने लगा। अटवासिया ने ब्यूरो के अधिकारियों को आरोपी को ले जाने व नियमानुसार कार्रवाई करने के आदेश दिए।