जयपुर. जवाहरनगर बाईपास पर शांतिपथ के सामने बनने वाली सुरंग से बाहर निकलते ही एक खूबसूरत नया जयपुर नजर आएगा। स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने अपने पिछले कार्यकाल में भी नया शहर बसाने की बात कही थी, लेकिन तब योजना टल गई थी। उनका कहना है कि इस कार्यकाल में यह जरूर पूरी करेंगे। करीब 5 लाख की आबादी वाला यह शहर 45 वर्ग किमी में फैला होगा। इसके लिए सुरंग, सड़कों और कुछ बुनियादी सुविधाओं पर 1000 करोड़ रु. की लागत आएगी। इसमें चौड़ी सड़कें, बहुमंजिला इमारतें और कई प्रतिष्ठित संस्थान होंगे।
आगरा रोड और जयपुर शहर को जोड़ने वाले इस शहर को बसाने के लिए स्विस चैलेंज में आए प्रस्ताव को सरकार और जेडीए ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है। नए शहर की रूपरेखा बनाने वाले केएच शाह का मानना है कि जगतपुरा से आगरा रोड तक 75 फीसदी जमीन खाली पड़ी है। बाकी 25 फीसदी में थोड़ी-बहुत आबादी है। हालांकि जेडीए ने इस क्षेत्र को सेक्टर 34 और 35 के तहत अपने मास्टर प्लान में ले रखा है। सेक्टर रोड भी बना रखे हैं। बाकी जगहों के सेक्टर प्लान और बनाए जा सकते हैं। कुछ जगहों पर सेक्टर रोड बनाने का काम भी शुरू किया है, लेकिन यदि इस काम को योजनाबद्ध तरीके से किया जाए तो जयपुर शहर में आवास समस्या खत्म होने के साथ ही बेहतर विकास भी हो सकेगा।
यहां से मिलेगी शहर को कनेक्टिविटी
नया शहर बसने के साथ ही खो-नागोरियान वाली 300 फुट चौड़ी सड़क को शहर में कम से कम तीन या चार जगह से कनेक्टिविटी मिलेगी। सुरंग से निकलने वाला यातायात शांतिपथ होता हुआ जेडीए सर्किल से होकर रामबाग सर्किल से होता हुआ शहर के किसी भी हिस्से में जा सकेगा। दूसरी कनेक्टिविटी राजस्थान विश्वविद्यालय भवन के सहारे होते हुए गांधी सर्किल पर मिलेगी। यहां से जे.एल. एन. मार्ग, टोंक रोड होते हुए शहर में कहीं जा सकेंगे। तीसरी कनेक्टिविटी मालवीय रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज के पास ओटीएस चौराहे और चौथी जगतपुरा में जवाहर सर्किल तथा पांचवी एनआरआई कालोनी के पास मिल सकेगी।
130 फुट ऊंचा होगा पुल
नए शहर को जोड़ने के लिए झालाना की पहाड़ियों में जो सुरंग बनाई जाएगी उसमें यातायात कहीं पहाड़ में अंदर तो कहीं पुल से गुजरेगा। सुरंग में तीन पुल होंगे। इनमें एक पुल की ऊंचाई तो करीब 130 फुट होगी। इतनी ऊंचाई इसलिए रखी जाएगी जिससे सघन वन क्षेत्र बिलकुल प्रभावित नहीं हो।
इन्होंने की नया शहर बसाने की कल्पना
आगरा रोड स्थित ट्रांसपोर्ट नगर में राजेश मोटर्स के मालिक के. एच. शाह ने झालाना पहाड़ियों के पीछे नया शहर बसाने की कल्पना की है। मूलत: पेशे से इंजीनियर शाह देश में कई बड़ी परियोजनाओं को मूर्त रूप दे चुके हैं। वर्ष 1968 से जयपुर में रह रहे शाह के मन में अब इस खूबसूरत शहर के लिए कुछ करने की इच्छा जागृत हुई है। वे स्विस चेलेंज प्रक्रिया के तहत इस प्रोजेक्ट को अशोक लैलेंड कंपनी के साथ मिलकर करने को तैयार हैं।
अभी तक क्या थी बाधा
इस क्षेत्र के विकास में अभी तक वन क्षेत्र की वजह से परेशानी आ रही थी। इस परियोजना में यह प्रयास किया गया है कि वन क्षेत्र को कम से कम प्रभावित किया जाए। बल्कि घने वन और प्राकृतिक वातावरण का सुरंग के सौंदर्यकरण में उपयोग किया जाए। जितना क्षेत्र प्रभावित होगा, उतनी जमीन वन विभाग को दूसरी जगह दी जा सकती है।
शाह कर चुके हैं कई बड़े प्रोजेक्ट
इंजीनियर के. एच. शाह इससे पहले भी कई बड़े प्रोजेक्ट कर चुके हैं। देशभर में पेट्रोलियम पाइप लाइनों का जाल बिछाने में 60 फीसदी जमीनी काम शाह ने ही किया है। वे अभी भी महाराष्ट्र के पूना में बांध और बिजली संयंत्र और टनल बनाने जैसे काम कर रहे हैं।
हवाई अड्डा
हवाई अड्डा अभी जगतपुरा से करीब चार किलोमीटर है। नए शहर से इसकी दूरी करीब 15 किलोमीटर होगी। चौड़ी और उच्च क्वालिटी की सड़क होने से 15 से 20 मिनट में यह दूरी तय की जा सकेगी। जबकि शहर के अन्य किसी भी हिस्से से हवाई अड्डे तक पहुंचने के लिए 30 मिनट से 1 घंटा तक लगता है।
रेलवे स्टेशन
जयपुर जंक्शन तक पहुंचने के लिए जगतपुरा और नए शहर के लोगों को ज्यादा परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। सुरंग से होकर जेडीए सर्किल और रामबाग होते हुए करीब 30 मिनट में जयपुर जंक्शन पहुंच सकेंगे। गांधी नगर, दुर्गापुरा स्टेशन तक जाने में और भी कम वक्त लगेगा। हालांकि जगतपुरा में भी नया जंक्शन बनने की संभावना है।
बस स्टैंड
नया शहर से बस स्टैंड तक पहुंचने में करीब 35 मिनट लगेंगे। सुरंग से होकर अथवा गांधी सर्किल से होते हुए बाईस गोदाम होकर बस स्टैंड पहुंचा जा सकेगा। दिल्ली और आगरा की तरफ जाने वालों को नारायणसिंह सर्किल बहुत पास पड़ेगा। नया बस स्टैंड मानसरोवर में बनने से इस क्षेत्र के लोगों को और भी सुविधा होगी।
विश्वविद्यालय
इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए विश्वविद्यालय, सचिवालय और सवाई मानसिंह अस्पताल सबसे नजदीक होंगे। इन स्थानों पर जाने में 15 से 20 मिनट ही लगेंगे।