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वादों की पटरी पर आज दौड़ेगी ममता एक्सप्रेस
Shishir Soni Friday, July 03, 2009 06:41 [IST]  

mamtaनई दिल्ली. घटते कैश सरप्लस और माल लदान से मिलने वाले राजस्व में कमी के कारण रेलवे की बैलेंस शीट खस्ता हाल है। ऐसे में रेल मंत्री ममता बनर्जी के सामने जनता और उद्योग की उम्मीदों पर खरा उतरने वाला रेल बजट पेश करने की चुनौती है। वे शुक्रवार को रेल बजट पेश करेंगी।

रेल मंत्रालय के ‘क्रैश’ होते कैश सरप्लस का ग्रहण सुरक्षा और संरक्षा के मद में पड़ना सुरक्षित रेल परिचालन के लिए कतई ठीक नहीं है। वर्ष 2009-10 के रेल बजट में सुरक्षा और संरक्षा के मद में 7000 करोड़ रुपए की बजाय 5,300 करोड़ रुपए का प्रावधान किए जाने की संभावना है। विश्वव्यापी मंदी का असर जाहिर तौर पर रेलवे पर पड़ा है। वेंडर और गरीब तबके के यात्रियों के लिए रेलमंत्री बनते ही ममता बनर्जी ने 20 रुपए के रियायती पास की घोषणा की थी।

संभावना है कि इसे रेल बजट का हिस्सा बनाया जाए। ममता को भले ही यह विश्वास हो कि २क् रुपए के रेल-पास को वे ‘वोट-बैंक’ में तब्दील कर लेंगी, लेकिन उन्हें इस सच्चाई से भी दो-चार होना पड़ेगा कि योजना के लागू होते ही रेलवे के ‘कैश-बैंक’ पर दोहरी मार पड़ेगी। रेल पास के मद में एक झटके में तकरीबन 2,000 करोड़ रुपए बैलेंस-शीट से जाते रहेंगे। रेलवे को अनारक्षित श्रेणी से होने वाली वार्षिक आय में भी 11,000 करोड़ रुपए की चपत लगेगी।

कैश-सरप्लस की कमी पर चौंके विशेषज्ञ: रेलवे बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष जयप्रकाश बत्रा ने खास बातचीत में कहा, ‘अगर कैश-सरप्लस की खराब हालत की जानकारी पुख्ता है तो रेलवे के लिए यह बुरी खबर है। हम सभी को अंदेशा था कि मंदी के कारण असर पड़ेगा, लेकिन असर इतना ज्यादा असर होने का कतई अनुमान नहीं था।’ उन्होंने कहा, ‘अभी छठा वेतन आयोग भी लागू किया जाना है।’ कहां कमी रह गई? इस सवाल के जवाब में बत्रा कहते हैं, ‘विज्ञापन, स्पेशल ट्रेन, पार्सल, भू-संपदा के दोहन या फिर लाइसेंस-फीस के माध्यम से कमाई को बढ़ाने की कोशिश की जानी चाहिए।’

रेलवे बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष आरएन मल्होत्रा का मानना है कि ऐसा तो होना ही था। घटते कैश-सरप्लस को वे समय की मांग कहते हैं। मल्होत्रा ने कहा, ‘आय के साधन बने नहीं खर्च बढ़ता जा रहा है तो फंड आएगा कहां से!’ अप्रैल,मई और जून के महीने में केवल 3 फीसदी माल लदान को वे बेहतर मानते हैं।

उन्होंने कहा, ‘मुझे तो उम्मीद थी कि यह और कम होगा, लेकिन गिरे हुए बाजार में तीन फीसदी का लदान रेलवे की बैलेंस-शीट के लिए ऑक्सीजन का काम तो करेगा ही।’ एक सवाल के जवाब में मल्होत्रा ने भी माना कि कैश सरप्लस गत वर्ष की तरह नहीं हो सकता। तब का बाजार कुछ और था, अब का बाजार कुछ और है। उन्होंने उम्मीद जताई कि धीरे-धीरे अब रेलवे में भी पॉजिटिव-ग्रोथ दिखने लगेगी।

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