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सैनिकों की वापसी में छिपे खतरे
भास्कर नेटवर्क. Friday, July 03, 2009 10:07 [IST]  

- द वॉशिंगटन पोस्ट से

इराकियों ने मंगलवार को इराकी शहरों से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के अवसर को राष्ट्रीय संप्रभुता दिवस के रूप में मनाया। ढाई साल पहले इराक जातीय युद्ध और विभाजन की ओर बढ़ रहा था। आज इराक कहीं अधिक शांत और स्वतंत्र है।

चरम हिंसा के उस दौर से आज की तुलना करें तो हिंसा में 90 फीसदी की कमी हो चुकी है। देश की अधिकांश राजनीतिक ताकतें आगामी आम चुनाव में एक-दूसरे से होड़ करने की तैयारी कर रही हैं। यह अमेरिका और स्वयं इराक के लिए भी बड़ी उपलब्धि है।

किंतु यहीं कुछ परेशान करने वाले संकेत भी हैं। इराक के लिए गंभीर खतरा अलकायदा और दूसरे अतिवादी समूह हैं जिन्होंने पिछले सप्ताह बम धमाकों में 200 से भी अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया। वहीं उत्तरी इराक में कुर्द और अरबी तेल से समृद्ध जमीन और किरकुक शहर पर कब्जे के लिए संघर्षरत हैं।

हालांकि बराक ओबामा और इराकी प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी अपनी-अपनी राजनीतिक वजहों से इन आशंकाओं को हल्के में ले रहे हैं। ओबामा इराक से अमेरिकी फौजों की वापसी की समय सीमा को लेकर प्रतिबद्ध हैं जो उनके चुनाव अभियान का मुख्य आधार था।

वहीं अल मलिकी चुनाव से पहले एक मजबूत और राष्ट्रवादी इराकी के रूप में उभरना चाहते हैं। इसीलिए दोनों ही नेता मौजूदा आतंकवादी खतरों को नजरअंदाज करते हुए अमेरिकी फौजों की वापसी का खतरा उठाने को तैयार हैं।

‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ अमेरिका का प्रमुख अखबार है।

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