हिसार. रेलमंत्री ममता बनर्जी शुक्रवार को रेल बजट पेश करेंगी। हिसार के नागरिकों की निगाहें बजट पर हैं। कारण है कि एनसीआर क्षेत्र के नजदीक हिसार एकमात्र ऐसा शहर है, जो काउंटर मैगनेट सिटी में शुमार है। इसके बावजूद यहां रेल सेवाओं का नितांत अभाव है। जिले के लोग कोई तोहफा मिलने की उम्मीद में हर साल बजट देखते हैं, लेकिन निराशा हाथ लगती है। अब की बारी कुछ मिलेगा, यह ममता की ममता पर निर्भर है।
उम्मीदें और जरूरतें बहुत हैं। पुराने वादे विकास की पटरी पर दौड़ेंगे या नहीं, इसे लेकर भी इंतजार है। लगभग पांच साल पहले अग्रोहा में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की सार्वजनिक घोषणा जिले के लोगों को आज भी याद है, जिसमें उन्होंने कहा था कि जिले को बेहतर रेल सुविधाएं मिलेंगी। हिसार से अग्रोहा रेल मार्ग का काम आगामी तीन माह में शुरू कर दिया जाएगा। उस वादे को पांच साल बीत गए, लेकिन सिरे नहीं चढ़ पाया।
जिला के रेलवे इतिहास पर नजर दौड़ाई जाए तो वर्र्षो से यहां के बाशिंदों को कोई नई रेल सेवा मिलने की बजाय कई गाड़ियों से हाथ धोना पड़ा है। जिन गाड़ियों से जिले के लोगों को हाथ धोना पड़ा है, उसमें सबसे पहला नाम हिसार से रेवाड़ी होते हुए गुड़गांव जाने वाली रेल का आता है। हिसार के पूर्व सांसद युद्धबीर सिंह के प्रयासों से इस रेल को चलाया गया था। वर्ष 1996 में रेलवे ने बड़ी रेल लाइन में परिवर्तन करने के बहाने इस रेल को बंद कर दिया।
क्या चाहते हैं लोग
नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन यशवीर गोयल का कहना है कि हिसार से अहमदाबाद, हरिद्वार, उत्तर प्रदेश, बिहार, कोलकात्ता, मुंबई व बेंगलुरु आदि क्षेत्रों से सीधे जोड़ने वाली लंबे रूट की ट्रेनों को चलाने की सख्त जरूरत है। इसके लिए पिछले वर्ष एक प्रतिनिधिमंडल ने पिछले वर्ष रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव से दिल्ली में मुलाकात कर मांग भी की थी। प्रदेश व्यापार मंडल के अध्यक्ष बजरंग दास गर्ग ने कहा कि अक्टूबर 2004 में लालू प्रसाद यादव अग्रोहा आए थे।
उस वक्त उन्होंने लोगों की मांग पर यह आश्वासन दिया था कि हिसार से अग्रोहा, पीरावांली, फतेहाबाद व डिंग आदि मार्ग पर नई रेल लाइन का निर्माण कार्य अगले तीन महीनों में शुरू करा दिया जाएगा। उनके आश्वासन पर इस लाइन के लिए सर्वे तो हुआ, लेकिन पांच साल बीतने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। भारतीय उद्योग रतन से सम्मानित श्रीराम राजलीवाला का कहना है कि यहां दो मुख्य मांगे हैं।
पहली उकलाना से नरवाना के बीच की मात्र 24 किलोमीटर की दूरी को आपस में जोड़ दिया जाए तो यहां का संपर्क सीधे चंडीगढ़ से हो जाता है। दूसरी मांग हिसार से लंबे रूट की ट्रेनों को चलाने को लेकर है। रेलवे स्टेशन पर सेवारत जय सियाराम जल सेवा समिति के प्रधान किशनलाल बागड़ी ने कहा कि यहां के लोगों की मुख्य समस्या ट्रेनों के लंबे समय तक लेट चलने के कारण हो रही है। किसी ट्रेन के 15 से 20 मिनट तक लेट होने की बात तो समझ में आती है, लेकिन वह ट्रेन अगर 2 से 3 घंटे लेट होती है तो उससे सवारियों को कितनी परेशानी होगी, यह किसी से छिपी नहीं है।
उन्होंने कहा कि रेलवे को हिसार से जम्मू के लिए स्पेशल ट्रेन चलानी चाहिए, ताकि यहां के लोगों को अमरनाथ व वैष्णो देवी की यात्रा पर जाते समय किसी प्रकार की परेशानी न हो। डॉ. उमेश कालड़ा का कहना है कि विभाग को हिसार से दिल्ली जाने के लिए हांसी रेलवे स्टेशन से ही सीधे रोहतक लाइन में मिलान करना चाहिए। ऐसा करने से यहां के लोगों को करीब दो घंटे का कीमती समय बर्बाद होने से बच सकता है।
गोरखपुर धाम जैसी ट्रेन जो शाम के समय हिसार से दिल्ली जाती थी, को नियमित रूप से जारी रखना चाहिए। इंडियन ऑयल कारपोरेशन के सीनियर डिवीजनल सेल्स मैनेजर राजीव माथुर का कहना है कि हिसार से चंडीगढ़ के बीच एक जन शताब्दी ट्रेन अवश्य चलानी चाहिए। यह ट्रेन यहां से सुबह चलकर रात को वापस लौटे तो चंडीगढ़ काम के लिए जाने वाले हजारों लोगों को रोजाना फायदा होगा। रेलवे कई शहरों में इस तरह की जन शताब्दी ट्रेनें चला रहा है, जो काफी कामयाब हैं।