अक्षय खन्ना की फिल्म ‘शॉर्टकट - द कॉन इज ऑन’ प्रदर्शन को तैयार है। यह अलग बात है कि उनकी चर्चा इसमें निभाए गए किरदार के बजाए साथी कलाकार अरशद वारसी और निर्माता अनिल कपूर से विवादों के चलते हो रही है। एक खास बातचीत में उन्होंने इस पर स्थिति स्पष्ट की।
- आपको नकारात्मक किरदारों में भी काफी सराहा गया है। क्या सोचकर ऐसी भूमिकाएं करने लगे?
आप जो असल जीवन में नहीं हैं, वैसे किरदार निभाने में बड़ा मजा आता है। हम निभाए जाने वाले अच्छे और सकारात्मक किरदार से स्वयं को आसानी से जोड़ लेते हैं, लेकिन रुपहले परदे पर बुरे आदमी का किरदार निभाना चुनौतीपूर्ण होता है। वैसे भी प्रत्येक इंसान में अच्छाई-बुराई मिश्रित रूप में होती है। ऐसे में बुराई को प्रदर्शित करना अच्छा लगता है।
- आप इतने अलग-थलग क्यों रहते हैं?
मैं अलग-थलग रहने वाला शख्स नहीं हूं। हां, मुझे अपने निजी जीवन पर बात करने में असहजता महसूस होती है। संभवत: इसी वजह से लोग मेरे बारे में ऐसी राय रखते हैं।
- जीवन के बारे में या अभिनय पर डैड ने क्या टिप्स दीं?
उन्होंने मुझे एक अच्छा इंसान बनना सिखाया है। इसके अलावा उन्होंने मुझे या राहुल को कोई टिप्स नहीं दी हैं। उन्होंने हमें अपनी अंतरात्मा की आवाज पर फैसले करना सिखाया है।
- आईफा समारोह के दौरान अनिल कपूर और आपके बीच हुए विवाद की सच्चई क्या है?
अनिल मेरे बड़े भाई की तरह हैं और हमेशा रहेंगे। यह सच है कि मैं आईफा के दौरान फिल्म की प्रेस कांफ्रेंस में शामिल नहीं हो सका था, क्योंकि मेरी तबियत खराब थी। सच्चई यही है कि मेरा पेट दुख रहा था और इस कारण मैं प्रेस कांफ्रेंस में शामिल नहीं हो सका।
बाद में बड़े भाई और फिल्म निर्माता के रूप में अनिल ने मुझसे फिल्म के प्रमोशन की डेट्स जानने के लिए फोन किया था। अब अगर आप इसे विवाद मानते हैं तो इसका मैं कुछ नहीं कर सकता हूं।
- यह भी सुनने में आया है कि आप और अरशद वारसी के बीच भी आईफा के दौरान कुछ विवाद हो गया था?
ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था! हां, हम फिल्म के प्रमोशन के लिए एक साथ एक ही मंच पर नहीं पहुंचे, लेकिन उसके पीछे हमारे अपने-अपने कारण रहे। हम दोनों ही प्रोफेशनल हैं और बच्चों जैसी बातों में नहीं उलझ सकते।