मुझे नहीं लगता कि आज रेल बजट शेयर बाजार को कुछ खास उत्साहित कर सका है।हालांकि दोपहर बाद के कारोबार में बाजार ने एक अच्छी रफ्तार पकड़ी, लेकिन रेल बजट की किसी घोषणा के चलते ऐसा नहीं हुआ। दरअसल रेल बजट पेश होने के दौरान तो सेंसेक्स में मोटे तौर पर लगभग 0.5% तक कीहल्की बढ़त दिख रही थी और कुछ देर के लिए सेंसेक्स लाल निशान में भी आ गया। रेल बजट पेश होने के दौरान सेंसेक्स का सबसे ऊपरी स्तर 14,749 का था, जिस पर यह केवल 91 अंक या 0.6% की बढ़त दिखा रहा था। विश्वस्तरीय 50 स्टेशन 
यह कहा जा सकता है कि रेल बजट पूरा हो जाने के बाद पूरे बाजार की नजरें इस बात पर जम गयीं कि बस आने वाले सोमवार को बजट पेश होना है। आजकल बाजार में किसी घटना की प्रतिक्रिया बड़ी जल्दी आती है और तुरंत ही निपट भी जाती है। बाजार फौरन ही अगले मुद्दे के बारे में सोचने लग जाता है। आज दोपहर बाद जो उछाल आयी, उसका रेल बजट से ताल्लुक क्यों नहीं था यह समझने के लिए सबसे तेज क्षेत्रों पर नजर डाल लें। आज के पाँच सबसे तेज क्षेत्र हैं बैंकिंग, कैपिटल गुड्स, बिजली, स्वास्थ्य सेवाएँ और रियल एस्टेट। इनमें बैंकिंग और बिजली का रेल बजट से कोई सीधा संबंध जुड़ता ही नहीं है। कैपिटल गुड्स में भी ऐसे शेयरों में ज्यादा तेजी दिखी है, जिनको रेल बजट के बदले दूसरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से ज्यादा फायदा मिलना है। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में दवा कंपनियों के शेयर जरूर चढ़े हैं, लेकिन कुछ रेलवे अस्पतालों में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए निजी क्षेत्र की मदद लेने की घोषणा से ग्लेनमार्क फार्मा, सिप्ला और रैनबैक्सी की तेजी को जोड़ कर देखना जरा मुश्किल है। रेलवे स्टेशनों पर मॉल और मल्टीप्लेक्स बनाने की घोषणा से रियल एस्टेट कंपनियों को जरूर नया काम मिलने की उम्मीद बँधी है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि रेल बजट में यह घोषणा होने के तुरंत बाद मल्टीप्लेक्स कंपनियों के शेयरों में ही कोई उत्साह नजर नहीं आया।आइये देखें रेल मंत्री ममता बनर्जी की अलग-अलग घोषणाओं के चलते चुनिंदाशेयरों पर आज कैसा असर रहा:
स्टेशनों पर बजट होटल
स्टेशनों पर मल्टिप्लेक्स
रेलवे नेटवर्क का विस्तार
रेल सिग्नल व्यवस्था में सुधार, टक्कर-रोधी तकनीक काप्रयोग
फ्रेट टर्मिनल निजी हाथों में