Health
आम से रहें सावधान
डीबी स्टार नेटवर्क Friday, July 03, 2009 17:53 [IST]  

mangoबेंगलुरू में किए गए एक शोध से यह बात सामने आई है कि आमों में कुछ कीटनाशक तय मानकों से कई गुना ज्यादा हैं। इन आमों में ऐसे कीटनाशक भी पाए गए हैं जो इंसानी तंत्रिका तंत्र को पूरी तरह खराब कर सकते हैं वहीं वर्ल्ड हैल्थ ऑर्गनाइजेशन द्वारा बेहद खतरनाक घोषित किए गए एंडोसल्फान की भी नुकसानदायक मात्रा आमों में पाई गई है। शोध में कहा गया है कि इन आमों का सीधा असर स्वास्थ्य पर हो सकता है।

आम के सीजन में इनके दीवानों के लिए बेंगलुरू की एक स्टडी ने चिंता खड़ी कर दी है। बैंगलोर यूनिवर्सिटी के पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा की गई एक शोध के अनुसार इनमें कीटनाशकों की मात्रा खतरे से कहीं ज्यादा पाई गई है।

यह शोध दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाले रसपुरी आम पर की गई जिसका वैज्ञानिक नाम मेंगीफेरा इंडिका है। इस आम पर शोध में पाया गया कि इनमें कीटनाशकों का स्तर इंसानों के लिए तय किए गए मानदंडों से कहीं ज्यादा है। इन कीटनाशकों में सिप्रामेथरीन और फेनवलेरेट जैसे खतरनाक तत्व शामिल हैं।

यूनिवर्सिटी के पर्यावरण विभाग के प्रमुख आरके सोमशेखरम का कहना है कि की सिप्रोमेथरीन और फेनवलेरेट इंसानी तंत्रिका तंत्र को पूरी तरह खराब कर सकते हैं। इन आमों में एंडोसल्फान की भी बड़ी मात्रा पाई गई है। इससे टॉक्सिक प्रभावों के साथ ही सेक्सुअल फंक्शन पर भी असर पड़ सकता है।

इन तीन खतरनाक तत्वों के अलावा इन आमों में हेक्साक्लोरासाइक्लोहेक्जेंस भी पाया गया है। शोध करने वाले रिसर्च स्कॉलर सैयद इस्माईल महादेवन कहते हैं कि हमने बाजार से ताजे फल लेकर उन्हें अपने प्रयोगों में शामिल किया।

वर्ल्ड हैल्थ ऑर्गनाइजेशन द्वारा इंसानों के लिए बेहद खतरनाक की श्रेणी में रखे गए एंडोसल्फान की मात्रा भी तय मानकों से ज्यादा पाई गई है। सिप्रामेथरीन की अधिकतम मात्रा 0.03 मिलीग्राम प्रति किलो हो सकती है लेकिन यह 0.143 मिलीग्राम प्रति किलो तक पाई गई।

क्या हो सकता है

बॉयोलॉजिस्ट्स का कहना है कि फलों में कीटनाशकों के बढ़ते प्रयोग को रोकने के लिए कोशिश की जाना चाहिए। इसके लिए इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट प्लान बनाया जाना चाहिए। इसके जरिये न सिर्फ इन पर उगाने के दौरान कीटनाशकों के उपयोग को सीमित किया जा सकता है बल्कि इन्हें सुरक्षित रखने के दौरान भी इसे कम किया जा सकता है।

यहां कम है खतरा

मध्यप्रदेश में दक्षिण भारत से बड़ी मात्रा में आम आते हैं। नीलम, तोतापरी और बादाम जैसी सबसे ज्यादा प्रचलन वाले कई आम दक्षिण से ही सबसे ज्यादा आते हैं। एक थोक आम व्यापारी का कहना है कि रसपुरी आम मध्यप्रदेश में बेहद कम ही आता है। देशभर में दक्षिण के आमों का प्रतिशत काफी बड़ा है।

Bookmark and Share


अपने विचार यहां लिखें:
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: