Bhopal
गिर सकते हैं जर्जर पेड़
Bhaskar Correspondent Saturday, July 04, 2009 02:30 [IST]  

old treeभोपाल. आमधारणा से उलट राजधानी में कुछ ऐसे पेड़ हैं, जिनका खड़ा रहना शहरवासियों की जिंदगी के लिए खतरा बन सकता है। यह वे पेड़ हैं, जो या तो पूरी तरह सूख चुके हैं या फिर अपनी जड़ों को अलविदा कहने की ओर अग्रसर हैं। गत शुक्रवार को ही सात नंबर बस स्टॉप के पास ऐसा ही एक पेड़ बिना किसी तेज हवा या बारिश के धराशायी हो गया था। इससे काफी देर तक क्षेत्र की बिजली गुल रहने के साथ ही यातायात भी बाधित रहा।

यूं तो अभी तक इन पेड़ों का सर्वे नहीं किया गया है, लेकिन नगर निगम और राजधानी परियोजना प्रशासन से जुड़े अधिकारियों की मानें तो शहर में ऐसे पेड़ एक लाख के करीब होंगे। पेड़ों की बड़ी संख्या दुर्घटना का दायरा भी बढ़ा रही है। बिना किसी आंधी-तूफान के ये धीरे-धीरे धराशायी होने की ओर बढ़ रहे हैं। इनका गिरना किसी दिन शहर में बड़ी दुर्घटना का सबब बन सकता है। ऐसे पेड़ों में नीलगिरी, अकेशिया अरीकूलीफार्मेस जैसर प्रजाति के जल्दी बढ़ने और कम उम्र वाले अधिक हैं।

नए शहर के अरेरा कॉलोनी सभी सेक्टर, कमला पार्क रोड, लिंक रोड नंबर दो, होशंगाबाद रोड, 1250 अस्पताल के आसपास, शिवाजी नगर, रेडक्रॉस अस्पताल, 74 बंगला क्षेत्र, कोलार रोड पहाड़ी क्षेत्र में ऐसे पेड़ों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। यहां आपको हर गली-मोहल्ले में ऊंचे-बड़े सूखे पेड़ नजर आ जाएंगे। इन क्षेत्रों में लोगों का काफी आना-जाना रहता है, ऐसे में इनका धराशायी होना लोगों की जान दुश्मन बन सकता है।

गौरतलब है कि पौधरोपण से लेकर उनके संरक्षण के लिए नगर निगम के साथ ही राजधानी परियोजना प्रशासन दो संस्थाएं काम कर रही है। वन विभाग भी समय-समय पर मदद देता रहता है। विगत वर्षो में इन संस्थाओं ने शहर में 24 लाख से अधिक पौधे रोपे, लेकिन सूखे और उम्रदराज पेड़ों का सर्वे नहीं किया। सीपीए अधिकारियों की मानें तो राजधानी में सबसे अधिक पौधरोपण 1955 और भोजवेट लैंड परियोजना के तहत 1995 से 2000 के बीच किया गया था। इनमें कई पेड़ दस से पंद्रह आयु वर्ष के थे। अब यह अपनी जड़ों को छोड़कर सूखे ठूंठ बनते जा रहे हैं। जनहित में इन्हें हटाना जरूरी हो गया है।

सूखने की यह भी वजह

रिटायर्ड वन अधिकारी टीके चतुर्वेदी पेड़ों के सूखने की एक बड़ी वजह गर्डलिंग को बता रहे हैं। उनका कहना है कि अपनी जलाऊ ईंधन संबंधी आवश्यकता की पूर्ति के लिए लोग घर के पास स्थित पेड़ की छाल निकाल देते हैं। छाल निकलने से वृक्ष का फूड सप्लाई सिस्टम गड़बड़ा जाता है और वे सूख जाते हैं। पेड़ सूखने के साथ ही उसकी जमीनी पकड़ कमजोर हो जाती है और वह बिना किसी आंधी-तूफान के स्वत: ही धराशायी हो जाता है।

बन रही सर्वे योजना

राजधानी परियोजना प्रशासन वन विभाग के वन संरक्षक डॉ. अतुल श्रीवास्तव बारिश बाद वृक्षों की गिनती शुरू करने की बात कह रहे हैं। उनका कहना है कि इसमें उम्रदराज और सूखे पेड़ भी चिह्न्ति हो जाएंगे। पेड़ हटाने से पहले वृक्ष अधिकारी से अनुमति जरूरी है।

आप भी कर सकते हैं पहल

वृक्ष अधिकारी-निगमायुक्त मनीषसिंह का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में कोई सूखा वृक्ष है तो उसे हटवाने के लिए नगर निगम में आवेदन दिया जा सकता है। निगम का दल उसे हटाने की कार्रवाई करेगा।

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