चंडीगढ़. हरियाणा के जिन दो राष्ट्रीय पार्र्को व आठ वन्य जीव अभ्यारण्यों को वनस्पति व वन्य जीवों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए इको सेन्सेटिव जोन (ईएसजेड) के तहत अधिसूचित किया गया है, वहां निर्माण व खनन गतिविधियों पर प्रतिबंध होगा। इन क्षेत्रों में कोई औद्योगिक इकाई भी नहीं लग सकेंगी।
वन व पर्यावरण राज्य मंत्री किरण चौधरी ने आज यहां एक प्रेस कांफ्रेंस में यह जानकारी देते हुए कहा, अभ्यारण्यों व राष्ट्रीय पार्को की सीमा से दो किलोमीटर के दायरे में कोई भी लकड़ी आधारित उद्योग, तीन किलोमीटर के दायरे में कोई प्रदूषण फैलाने वाला नया उद्योग और पांच किलोमीटर के दायरे में कोई भी अधिक प्रदूषण फैलाने वाला नया उद्योग स्थापित नहीं किया जाएगा। इसके लिए एक राज्य स्तरीय मूल्यांकन समिति गठित की जाएगी, जो इस संबंध में निर्णय लेने के लिए सक्षम होगी।
चौधरी ने कहा, अभ्यारण्यों व राष्ट्रीय पार्को की सीमा से पांच सौ मीटर की दूरी तक नलकूप चैंबरों के सिवाय किसी निर्माण कार्य की अनुमति नहीं दी जाएगी। इन क्षेत्रों की सीमा से 500 मीटर तक खनन और दो किलोमीटर तक क्रशिंग के लिए भी मंजूरी नहीं मिल पाएगी।
ईएसजेड के मामले में हरियाणा को देश का पहला राज्य बताते हुए चौधरी ने कहा, केन्द्र से 33018 हैक्टयर के तहत आने वाले इन क्षेत्रों को अधिसूचित करवाने के लिए पिछले चार साल से प्रयास जारी थे। इसके लिए उन्होंने यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का आभार व्यक्त किया है।
ईएसजेड का इलाका
दो राष्ट्रीय पार्क: यमुनानगर का कालेसर राष्ट्रीय पार्क और गुड़गांव का सुल्तानपुर राष्ट्रीय पार्क।
आठ वन्य जीव अभ्यारण्य: यमुनानगर का कालेसर वन्य जीव अभ्यारण्य, झज्झर का खपड़वास व भींडावास वन्य जीव अभ्यारण्य, पंचकूला का खोल रायतान व बीर सिकारगढ़, रेवाड़ी का नाहर, सिरसा का अबुबशहर, जींद का बीर बाराबन कंजरवेशन रिजर्व और कैथल जिले का सरस्वती कंजरवेशन रिजर्व।