चंडीगढ़. केंद्रीय जल संसाधन व संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल भी पंजाब यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा देने के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने से पीयू को केंद्र से ज्यादा पैसा मिलेगा। इससे यूनिवर्सिटी के स्टैंडर्ड में सुधार होगा और स्टूडेंट्स को क्वालिटी एजूकेशन दी जा सकेगी।
स्थानीय सांसद पवन बंसल के मुताबिक पंजाब यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा देने की सभी तैयारियां मुकम्मल कर ली गई थीं। बकौल बंसल, मैंने खुद भागदौड़ कर केंद्रीय मानव संसाधन व विकास मंत्रालय से लेकर प्रधानमंत्री तक को इसके लिए मना लिया था। ऐन मौके पर पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर पंजाब यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा देने में असहमति जता दी।
इससे सभी उम्मीदों पर पानी फिर गया और केंद्र सरकार ने पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी स्टेटस देने का प्रस्ताव रद्द कर दिया। बंसल ने बताया कि बजट सत्र खत्म होने के बाद वह नए सिरे से पंजाब यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलाने का प्रयास करेंगे। उनके मुताबिक निजी स्वार्र्थो से ऊपर उठकर रीजन के लोगों का हित सोचने की जरूरत है। सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने से यहां पढ़ने आने वाले स्टूडेंट्स को ही फायदा होगा।
बढ़ता ही जा रहा है पंजाब यूनिवर्सिटी पर आर्थिक बोझ
पिछले कुछ साल से पीयू पर आर्थिक बोझ बढ़ता ही जा रहा है। इन हालात में सेंट्रल स्टेटस या सेंट्रल फंडेड यूनिवर्सिटी ही पीयू को आर्थिक बदहाली से बचा सकता है। इस बदहाली की एक वजह यह भी है कि पीयू को पंजाब सरकार से मिलने वाली ग्रांट की पूरे हिस्से की अदायगी न होना।
पीयू को ग्रांट की पूरी राशि जारी न होने से पंजाब पर अभी पीयू का 54 करोड़ रुपए बकाया है। हालत यह हो गई है कि पीयू के मौजूदा वित्त वर्ष के 290 करोड़ रुपए के कुल खर्चे में से 101 करोड़ का प्रस्तावित घाटा है। घाटे की इस राशि की भरपाई के लिए पीयू को दूसरों के आगे हाथ फैलाने पड़ेंगे। आर्थिक मंदी की वजह से पीयू को स्टूडेंट्स की बढ़ती तादाद की जरूरतें पूरी करने के लिए दूसरे खर्चे में कटौती करनी पड़ रही है।
पीयू को कुल बजट का 77 फीसदी हिस्सा स्टाफ के वेतन और रखरखाव पर ही खर्च करना पड़ रहा है। मौजूदा वित्त वर्ष में भी 168 करोड़ वेतन और 106 करोड़ रुपए दूसरे जरूरी खर्चे को पूरा करने के लिए जुटाने हैं। बाकी बचे 16 करोड़ ही नए शुरू होने वाले विकास कार्र्यो के लिए बचते हैं। मौजूदा वित्त वर्ष में पीयू को अपने स्रोतों से सिर्फ 106 करोड़ रुपए ही मिलेंगे। इसके अलावा कुछ पैसा केंद्र और पंजाब सरकार से पीयू के हिस्से के तौर पर मिलेगा। बाकी राशि के लिए पीयू को खुद ही हाथ मारने पड़ेंगे।