इंदौर. तीर सिर के पीछे (स्पाइनल कॉर्ड में) लगा और सीधा जबड़े में जा पहुंचा। ढाई घंटे की मशक्कत के बाद आखिरकार एमवाय अस्पताल के डॉक्टरों ने तीर निकाल दिया। गंधवानी निवासी रंगूबाई (35) को मंगलवार को सिर में तीर लगा था।
एमवाय अस्पताल के डॉ. पी.एस. लुबाना की यूनिट में उसका ऑपरेशन किया गया। तीर सिर के पिछले हिस्से से निकलकर जबड़े तक पहुंच गया था। तीर के आगे का हिस्सा मुड़ गया था। डॉक्टरों के लिए उसे निकालना मुश्किल था क्योंकि ऑपरेशन में स्पाइनल कॉर्ड को नुकसान होने का अंदेशा था। करीब ढाई घंटे चले ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों की टीम ने तीर निकाल दिया।
जोखिम भी कई थे : ऑपरेशन के दौरान या ब्रेन
इंजुरी अधिक होती तो मरीज कोमा में जा सकती थी। रीढ़ की नस यदि कटती तो वह जीवनभर के लिए विकलांग हो सकती थी।