जयपुर. बारिश के मौसम में हर साल शहर के आसपास के पिकनिक स्पॉट्स आबाद हो जाते हैं, लेकिन वहां होने वाली दुर्घटनाओं से न तो पर्यटन विभाग व प्रशासन चेते हैं और न ही लोगों ने सबक लिया है। ज्यादातर स्थानों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।
नाहरगढ़ से लेकर कानोता बांध और आमेर से लेकर रामगढ़ बांध तक ऐसे दर्जनों स्पॉट हैं, जो डेंजर जोन बन गए हैं। इनकी अनदेखी का नतीजा था कि शुक्रवार को पर्यटकों से भरी एक बस जयगढ़ की खाई में लुढ़क गई। भास्कर संवाददाता ने पहाड़ियों में जाकर देखा, तो वहां सबसे अधिक खतरा नजर आया।
पड़ाव के पास बनी बावड़ी के रास्ते को इतना अधिक स्लोप दिया गया है कि उस पर चलते हुए कोई भी फिसलकर गहरी बावड़ी में गिर सकता है। स्लोप के किनारे पर दीवार या जाल, चेतावनी का बोर्ड और गार्ड भी नहीं है। यहां आए भुवन ने बताया कि पिछले वर्ष साल बारिश में खुद उसका पांव यहां फिसल गया था, पर साथी का हाथ पकड़कर बच गया।
पानी के बहाव वाले कुंड में बड़ी संख्या में युवक-युवतियां दुपहिया वाहन लेकर पहुंच रहे हैं। फिलहाल इस कुंड में पानी काफी कम है। पिछले वर्ष एक इंजीनियरिंग छात्र की मौत हो गई थी। मानसरोवर निवासी राजू शर्मा ने बताया कि कुंड में जाने वालों को कोई गार्ड रोकता भी नहीं है। आमेर महल के पिछले सागर में भी लोग पिकनिक मनाने पहुंचते हैं। फिलहाल सागर में पानी नहीं है। आमेर निवासी निखिल ने बताया कि मानसून के दौरान जब पहाड़ियों से पानी बहता रहता है, तो सागर की ओर बने स्लोप के किनारे सुरक्षा दीवार नहीं होने से खतरा मंडराता रहता है।