रायपुर में एम्स की स्थापना दो साल में पूरी होने की संभावना कम है। अभी तो अस्पताल भवन की नींव बनाने का काम भी शुरू नहीं हो पाया है। टाटीबंध स्थित प्रस्तावित स्थल में अभी पुराने जिला अस्पताल की बिल्डिंग को तोड़कर बाउंड्रीवाल ही बनाई जा सकी है। भवन की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरणों में है। इसके बाद टेंडर होंगे तब काम शुरू हो पाएगा।
रायपुर में एम्स की स्थापना की घोषणा सितंबर 2003 में हुई थी। तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री सुषमा स्वराज ने टाटीबंध में इसकी आधारशिला रखी थी। उसके बाद यूपीए की सरकार केंद्र में बैठी और पूरी प्रक्रिया अधर में लटक गई। बाद में मार्च 2006 में इसकी प्रक्रिया फिर शुरू हुई।
राज्य शासन ने इसके लिए 104 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई है। जमीन का अधिग्रहण केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को हो चुका है। रायपुर के एम्स में 850 बिस्तरों वाले अस्पताल होगा। वहां इलाज की अत्याधुनिक सुविधाएं जुटाई जाएंगी। संस्थान के संचालन पर सालाना 700 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। इनमें 39 स्पेशियल्टी और सुपर स्पेशियल्टी विभाग होंगे। एम्स से जुड़े मेडिकल कालेज में हर वर्ष 100 छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा।्र अस्पताल के लिए पानी, बिजली तथा सड़क संपर्क की सुविधा राज्य सरकार उपलब्ध कराएगी।