रायपुर. रेल बजट में छत्तीसगढ़ को तीन नई ट्रेनें मिली हैं। इनमें से दो ट्रेनों की घोषणा अंतरिम रेल बजट में हो चुकी थी और एक अभी मिली है। इनके अलावा दो ट्रेनों का फेरा बढ़ाया गया है। एक की दूरी बढ़ाने का भी जिक्र किया गया है। बजट में रायपुर, बिलासपुर व दुर्ग स्टेशन को बहुउद्देश्यीय परिसर (मल्टी फंक्शनल कांप्लेक्स) बनाने की घोषणा की गई है। इसके अलावा रायपुर से गुजरने वाली 10 से ज्यादा डीएमयू और लोकल ट्रेनों में शौचालय की सुविधा मिलेगी। राज्य के आधा दर्जन डाकघरों में जल्द ही रिजर्वेशन की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
ये मिला-
- बिलासपुर-तिरुन्नवेल्ली व्हाया तिरुवनंतपुरम साप्ताहिक सुपरफास्ट
- दुर्ग-जयपुर साप्ताहिक एक्सप्रेस
- अंबिकापुर-जबलपुर एक्सप्रेस (तीन दिन)
- दुर्ग-निजामुद्दीन संपर्कक्रांति एक्सप्रेस अब तीन दिन
- पोरबंदर-हावड़ा व्हाया हापा एक्सप्रेस अब तीन दिन
- रायपुर-भुवनेश्वर इंटरसिटी सुपरफास्ट पुरी तक
- बिलासपुर रेलवे अस्पताल में रेलवे मेडिकल कालेज बनेगा
जितनी अपेक्षा थी, आधा भी नहीं मिला
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को भले ही तीन नई ट्रेनें मिली हैं, लेकिन देश की चारों दिशाओं में स्थित अब भी कई शहर कोसों दूर हैं। छत्तीसगढ़ को इससे ज्यादा की अपेक्षा थी। जो मिला है वह पहले से ही प्रक्रियाधीन था। जम्मू-कश्मीर, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, उत्तरांचल, गोवा और झारखंड ऐसे राज्य हैं, जहां के लिए रायपुर से कोई सीधी ट्रेन नहीं है। रेलमंत्री ममता बेनर्जी ने उत्तरपूर्वी क्षेत्र में दो दर्जन से ज्यादा ट्रेनों को मंजूरी दी हैं, जिनमें से एक भी ट्रेन रायपुर के लिए नहीं है। हावड़ा से एक नान-स्टाप ट्रेन मुंबई के लिए दौड़ेगी, लेकिन यहां इसका कोई फायदा नहीं। दुर्ग से जयपुर के लिए जो नई ट्रेन दी गई है, वह पिछले दो सालों से दौड़ रही है। यह गाड़ी अंतरिम रेल बजट में ही मंजूर हो गई थी। साथ ही हैदराबाद के लिए बिलासपुर से स्पेशल ट्रेन पूर्व में चलाई जा चुकी है। यही वजह है कि रेलवे ने आसानी से इसे हरी झंडी दे दी, लेकिन जम्मूतवी, गुवाहाटी, गोवा, रांची, अजमेर, बीकानेर, पांडीचेरी जैसे दर्जनभर शहर रायपुर से दूर ही रहेंगे।
दीदी ने धमतरी रेल लाइन को दिखाया ठेंगा
रेल मंत्री ममता बनर्जी के बजट में छत्तीसगढ़ को ढेर सारी सौगातें मिलने की उम्मीदें धराशायी हो र्गई। आम लोगों के साथ रेलवे के अधिकारियों को भी सीधे ट्रेन के जरिये नए महानगरों से जुड़ने की आशा थी। राजधानी के स्टेशन का कायाकल्प होने की उम्मीद थी। छोटी रेल लाइन के दिन के दावे किए जाने लगे थे पर ममता ने छग को कोई तवज्जो नहीं दी।
बजट में न तो रायपुर के कोचिंग कांप्लेक्स का जिक्र किया गया और न ही लोकल ट्रेनों का। तीसरी रेल लाइन बनने के बाद भी छत्तीसगढ़ को दो ही ट्रेनें मिल पाईं। पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने अपने बजट में धमतरी रेल लाइन को शामिल किया था। इसे ब्रॉड गेज यानी बड़ी लाइन करने की घोषणा की थी। पिछले बजट में सर्वे तक शामिल किया गया था। रेल मंडल के अधिकारियों ने बजट की घोषणा के मुताबिक सर्वे किया और रिपोर्ट भेज दी। ममता ने अपने बजट में इसका जिक्र न कर यह संकेत दे दिया कि उनका इरादा अभी इसे ब्रॉड गेज करने का नहीं है। लंबी दूरी की ट्रेनों के जनरल क्लास डिब्बों में जबर्दस्त मारामारी है। एसी क्लास में भी दबाव बढ़ गया है। रेलवे की बजट सूची में इनका कहीं जिक्र नहीं है। सरस्वतीनगर स्टेशन को सब स्टेशन के रूप में विकसित करने के बारे में भी किसी तरह का निर्णय नहीं लिया गया है।
नए रायपुर का स्टेशन अधर में
मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने नए रायपुर में एक नए स्टेशन का जो प्रस्ताव भेजा था, उसका बजट में कहीं जिक्र नहीं हुआ। ममता बेनर्जी ने भी पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की तरह अपने बंगाल को ही सौगातें दी हैं। नए रायपुर से लगा मंदिर हसौद और आसपास का क्षेत्र संबलपुर मंडल में आता है, जो पूर्व तटीय रेलवे के अंतर्गत है। शासन यहां एक रेलवे स्टेशन को विकसित करना चाहती है, ताकि भविष्य में यह रायपुर का सब स्टेशन बन सके। इस संबंध में रेलवे ने भी बोर्ड को प्रस्ताव भेजा है। इसी तरह सरस्वतीनगर और रायपुर के छोटे स्टेशनों में भी किसी तरह की योजना को हरी झंडी नहीं दी गई।
जरूरी प्रस्ताव जो लंबित
दुर्ग-बिलासपुर के मध्य तीन नई लोकल, माडर्न इंक्वायरी सिस्टम, रायपुर में कोचिंग कांप्लेक्स, धमतरी लाइन को ब्राडगेज करना, धमतरी-कांकेर-जगदलपुर लाइन, स्टेशन पर फ्लैट ओवरब्रिज, खाने के स्तर में सुधार, दाम कम होने चाहिए, रायपुर से जगदलपुर, कांकेर, बस्तर के लिए भी ट्रेनें, राजधानी की तर्ज सब स्टेशन, छोटे स्टेशन में वेटिंग हाल, बैठने की जगह और मूलभूत सुविधाएं, स्टेशन पर चिल्हर मशीन, खाली स्लीपर क्लास बोगियां में यात्रा की रियायत, आरक्षित बोगियां बढ़ने. ताकि वेटिंग कम हो सके, प्रमुख ट्रेनों में अनारक्षित बोगियां बढ़नी चाहिए, खाने के स्तर में सुधार, दाम कम होने चाहिए, रायपुर से जगदलपुर, कांकेर, बस्तर के लिए भी ट्रेनें, राजधानी की तर्ज पर एक और सब स्टेशन, स्टेशन में वेटिंग हाल, बैठने की जगह और मूलभूत सुविधाएं।