मैं पैसों के लिए पेंटिंग्स नहीं बनाता। मैं कला की उस दुनिया का भी हिस्सा नहीं हूं जिसे इतना ‘हाइप’ दिया जा रहा है। मैं अपने समय को चित्रित करता हूं, लेकिन स्वयं उस समय का प्रतिनिधित्व नहीं करता हूं।’ ये बातें जाने-माने चित्रकार तैयब मेहता ने अपने आखिरी इंटरव्यू में कही थीं।
मुंबई में एक छोटे से फ्लैट में रहने वाले तैयब मेहता ने अपनी सारी जिंदगी कला को समर्पित कर दी। यह अलग बात है कि उनकी पेंटिंग्स की कीमत करोड़ों में आंकी गई।
तैयब मेहता का जन्म 26 जुलाई 1925 को गुजरात के खेड़ा जिले में हुआ था। उन्होंने अपने कॅरियर की शुरुआत एक सिनेमा लैबोरेट्री में फिल्म एडिटर के रूप में की, लेकिन पेंटिंग्स के प्रति जुनून उन्हें जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स ले गया जहां से उन्होंने 1952 में डिप्लोमा हासिल किया। वर्ष 1959 में वे लंदन चले गए और 1964 तक वहीं रहे।
प्रतिष्ठित रॉकफेलर फेलोशिप के लिए १९६8 में वे अमेरिका भी गए। वर्ष 1984-८५ के बीच वे शांति निकेतन में भी रहे। इसके बाद उन्होंने अपना लगभग पूरा जीवन मुंबई में बिताया। तैयब मेहता की दिलचस्पी फिल्मों में भी थी। उन्होंने लघु फिल्म ‘कूदाल’ बनाई थी जिसे वर्ष 1970 में फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवार्ड मिला था। उन्हें 2007 में पद्मभूषण सम्मान से अलंकृत किया गया।
तैयब मेहता की गिनती भारत के सबसे महंगे कलाकारों में होती रही है। वर्ष 2002 में उनकी बनाई पेंटिंग ‘सेलिब्रेशन’ डेढ़ करोड़ रुपए में नीलाम हुई थी जो उस समय किसी भी भारतीय कलाकार की कृति को मिलने वाली सबसे ज्यादा कीमत थी। वर्ष 2005 में ‘गेस्चर’ की नीलामी 3.१ करोड़ रुपए में हुई थी। पिछले साल जून में उनकी एक पेंटिंग रिकॉर्ड 10 करोड़ रुपए में नीलाम हुई।