Vichaar
अपना लाभ पहले ग्राहकों का बाद में
भास्कर नेटवर्क/डेर Saturday, July 04, 2009 11:17 [IST]  

केंद्रीय बैंक सस्ती दरों पर अरबों डॉलर व्यावसायिक बैंकों को उधार दे रहा है, ताकि बाजार में तरलता का संकट दूर हो सके, लेकिन ये बैंक यह धनराशि अपने ग्राहकों को मुहैया करवाने के बजाय खुद ही अन्य जगहों पर निवेश करके भारी मुनाफा वसूल रहे हैं।

ऐसे में उपभोक्ता संरक्षण मामलों की मंत्री इल्से आइगर का इस बात पर नाराज होना स्वाभाविक ही है कि बैंक ब्याज दरें घटाने में तो महीनों लगा देते हैं, लेकिन बढ़ाने में एक पल की भी देर नहीं करते।

पिछले एक सप्ताह के दौरान ही यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ईसीबी) ने 1100 वित्तीय संस्थानों को महज एक फीसदी ब्याज दर पर 619 अरब डॉलर की रिकार्ड राशि दी, लेकिन यह राशि उन लोगों तक नहीं पहुंची जिनके लिए केंद्रीय बैंक ने जारी की थी।

इससे साफ है कि बैंकों ने इस सस्ती धनराशि को सुरक्षित निवेश में लगा दिया होगा। उधर लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा बढ़ता जा रहा है कि उन्हें अपने ओवरड्रॉफ्ट पर अब भी दो अंकों की दर से ब्याज चुकाना पड़ रहा है।

सवाल यह है कि ऐसे वित्तीय संकट में क्या बैंक आम लोगों की कीमत पर अपना उल्लू सीधा करने में लगे हुए हैं? दो साल पहले जर्मनी में शुरू हुए वित्तीय संकट में कई बैंकों की हालत पतली हो गई थी। अनेक बैंक दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गए थे। यदि उस समय सरकार आगे नहीं आती तो उनमें से कई बैंकों का आज अस्तित्व ही नहीं रहता।

‘डेर स्पेजल’ जर्मनी की प्रमुख अंग्रेजी पत्रिका है।

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