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आदिवासियों की नाराजगी ने दी थी दंगों को हवा
शुभाशीष मोहंती Saturday, July 04, 2009 15:47 [IST]  

भुवनेश्वर । जिला प्रशासन के प्रति स्थानीय लोगों, खासतौर पर आदिवासियों की नाराजगी ने कंधमाल में सांप्रदायिक दंगों को हवा दी थी। यह उल्लेख जस्टिस शरद चंद्र महापात्र के नेतृत्व वाले एक सदस्यीय आयोग ने कंधमाल हिंसा पर बुधवार को उड़ीसा सरकार को सौंपी गई अपनी अंतरिम रिपोर्ट में किया है।

महापात्र ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में जमीन विवाद, धर्म परिवर्तन और फर्जी प्रमाण पत्र जैसे मुद्दों को दंगे भड़कने का मुख्य कारण बताया है। हालांकि महापात्र ने धर्म परिवर्तन के बारे में विस्तृत रूप से कुछ नहीं बताया है।

दंगों में संघ परिवार के संगठन की भूमिका का भी रिपोर्ट में विस्तृत उल्लेख नहीं है, लेकिन दंगे रोकने में पुलिस की निष्क्रियता की कड़ी निंदा की गई है। रिपोर्ट में आदिवासियों के लगातार शोषण और जमीन पर कब्जे से क्षेत्र के लोगों की नाराजगी की ओर भी इशारा किया गया है।

महापात्र ने कहा, ‘दंगे इसलिए भी हुए क्योंकि अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लोगों को संदेह था कि ‘पण’ दलितों ने फर्जी तरीके से उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया है।’

प्रशासन की उपेक्षा : आदिवासियों में इस बात को लेकर भी नाराजगी थी कि गैर आदिवासी फर्जी प्रमाण पत्र पेश कर उनके हिस्से की नौकरी छीन रहे हैं। स्थानीय प्रशासन को इस गोरखधंधे की खबर थी, लेकिन उसने इस धोखाधड़ी को रोकने के लिए कुछ नहीं किया। रिपोर्ट के मुताबिक, फर्जी प्रमाण पत्र मुद्दे ने भी दंगा भड़काने में बड़ी भूमिका निभाई थी, क्योंकि इसने कंध आदिवासियों में असंतोष पैदा कर दिया था।

कंध आदिवासी कंधमाल की कुल जनसंख्या का 52 प्रतिशत हैं।

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