लंदन। अंधे को आंख मिल जाए इससे सुखद अनुभव क्या हो सकता है। ऐसा ही एक वाकया ब्रिटेन के मार्टिन जोंस के साथ हुआ। चार साल पहले जब उनकी शादी हुई थी तो उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि कभी अपनी पत्नी को देख पाएंगे, परंतु डॉक्टरों की मदद से वे ऐसा करने में सक्षम हो गए हैं।
42 वर्षीय जोंस को अपनी खोई हुई आंख तो मिल गई है, लेकिन इसके लिए उन्हें अपने एक दांत की कुर्बानी देनी पड़ी। आंख में लेंस लगाने के लिए जरूरी बेस के लिए उनके दांत के एक हिस्से का इस्तेमाल किया गया है। डॉक्टरों को आशंका थी उनकी आंख किसी बाहरी प्लास्टिक जैसे पदार्थ को स्वीकार नहीं करेगी। आंख द्वारा अपने ही शरीर के हिस्से को अस्वीकार करने की संभावना कम रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों ने दांत का इस्तेमाल किया।
कैसे किया यह कारनामा
यह कारनामा ब्रिटेन के प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक क्रिस्टोफर लिउ ने कर दिखाया है। इसके लिए उन्होंने सबसे पहले स्टेम सेल का इस्तेमाल किया था, लेकिन दुर्भाग्यवश यह प्रयोग सफल नहीं रहा। इसके बाद लिउ ने जोंस की आंख में लेंस लगाने का फैसला किया। उन्होंने इसके लिए पहले जोंस के गाल से त्वचा लेकर आंख के बाहरी हिस्से पर चढ़ाई। नए हिस्से में रक्त संचार शुरू होने में दो महीने लगे, इसके बाद डॉक्टरों ने दांत में लेंस लगा कर उसे आंख में फिट कर दिया, जिससे वह देखने में सक्षम हो सके।
पत्नी को देखा सबसे पहले
जोंस को जब पता चला कि वह देख सकता है तो उसने सबसे पहले अपनी पत्नी को देखने की इच्छा व्यक्त की। जोंस ने कहा कि वह काफी सुन्दर और प्यारी लग रही थी, मैं बता नहीं सकता कि मुझे उन्हें देखने से कितनी खुशी मिली। शादी से पहले से ही मैं अंधा था, परंतु मुझे लगता था कि वह बहुत अच्छी होंगी और सचमुच वह हैं।
कैसे गईं थीं आंखें
जोंस की आंखें एक दुर्घटना में चली गईं थीं। करीब बारह साल पहले उनके चेहरे पर गर्म एल्यूमीनियम से भरा टब गिर गया था। इस हादसे में उनका चेहरा 37 फीसदी तक जल गया था। उनकी आंखों की रौशनी चली गई तथा एक आंख का निकालना पड़ा।