इंदौर. हुकमचंद पॉलीक्लिनिक अस्पताल में नवजात की मौत के मामले में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब मजिस्ट्रियल जांच में दोषी पाई गई बर्खास्त आया किरण नायक ने रिश्वत लेने की बात स्वीकारी। उसने आरोप लगाया कि मिलने वाली राशि में से आधा हिस्सा अस्पताल प्रभारी डॉ. आशुतोष शर्मा को जाता था जबकि बाकी सिस्टर रूबी व वह रखती थी। उधर तीन डॉक्टरों पर गैरइरादतन हत्या के मामले में अब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का इंदौर चैप्टर भी डॉक्टरों के बचाव में सामने आ गए हैं।
बर्खास्त आया किरण नायक ने माना 18 जून को उसने पीड़ित प्रभावती से 2000 रुपए लिए थे। किरण के खिलाफ एफआईआर का मामला दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। किरण ने खुलासा किया कि जनवरी में बर्खास्त होने के बाद भी छह माह से बिना वह सेवाएं दे रही थी। बर्खास्त एएनएम शैफाली चौहान व किरण ने बताया अपर कलेक्टर की जांच के दौरान भी उसे समझाया गया था कि जांच अधिकारी के सामने कुछ मत कहना।
रूबी खान के पति लतीफ पर आरोप लगाते हुए उसने मुझसे कहा था किसी का नाम नहीं लेना, बाद में नौकरी पक्की करवा देंगे। डॉ. शर्मा एवं नर्सिग इंचार्ज को मेरे काम करने की जानकारी थी। उस रात सारी डिलीवरी मैंने ही करवाई थी। प्रसूता के साथ मारपीट मामले में किरण का कहना है थंडर प्रेशर देना पड़ता है, मैं अकेले यह काम नहीं कर सकती थी।