Chandigarh
हाउसिंग, महंगाई की है चिंता
भास्कर न्यूज Sunday, July 05, 2009 03:44 [IST]  

चंडीगढ़. कैसा हो बजट, इस पर ट्राईसिटी के लोगों से रायशुमारी ली गई। इनमें व्यापार, इंडस्ट्री, प्रोफेशनल्स, महिलाएं और युवा शामिल थे। इसमें सामने आया कि लोगों को सबसे ज्यादा फिक्र महंगाई और हाउसिंग की है।

चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष व काउंसलर एमपीएस चावला कहते हैं कि बजट में महंगाई कम करने पर तो विशेष ध्यान होना ही चाहिए साथ में यह देखा जाना भी जरूरी है कि देश की आर्थिक प्रगति कैसे हो। जीरकपुर बिल्डर एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी राजीव मल्होत्रा का कहना है कि हाउसिंग लोन की दर कम किए बगैर घर का सपना पूरा नहीं हो सकता।

सर्वे में शामिल लोगों से जब बजट से उनकी सबसे बड़ी उम्मीद के बारे में पूछा गया तो 40 फीसदी ने कहा कि महंगाई घटनी चाहिए। 40 फीसदी लोगों ने कहा कि मंदी ने लाखों नौकरियां छीन ली हैं ऐसे में रोजगार के अवसर बढ़ने चाहिए। जबकि 20 फीसदी लोग करों व लोन दरों में कटौती चाहते हैं।

महंगाई रोकने के लिए क्या हो?

इसके जवाब में 40 फीसदी लोगों ने कहा कि खाने-पीने की वस्तुएं हर हाल में सस्ती होनी चाहिए। प्रति व्यक्ति वाहनों के मामले में चंडीगढ़ देश में सबसे आगे है। ऐसे में यहां के 40 फीसदी बाशिंदे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती चाहते हैं। वहीं व्यापारी वर्ग चाहता है कि वैट दरों और उत्पाद शुल्क में कमी हो।

यह पूछे जाने पर कि वे बजट में बैंकों से क्या चाहते हैं, 40 फीसदी लोगों ने होम लोन दरें घटाए जाने पर जोर दिया। 30 फीसदी लोग चाहते हैं कि जमा पर ब्याज दर बढ़े। 20 फीसदी लोग एजूकेशन लोन की दरों में कटौती चाहते हैं। 10 फीसदी लोगों ने कहा कि कार लोन सस्ता होना चाहिए। वेतनभोगी तबके से पूछा गया कि आयकर में क्या बदलाव चाहिए, इस पर 40 फीसदी लोगों ने छूट की सीमा बढ़ाने पर जोर दिया। 20 फीसदी लोगों ने दरें घटाने की मांग रखी।

वहीं सर्विस टैक्स में बदलाव के बारे में पूछने पर 30 फीसदी लोगों ने कहा कि इसकी दरें कम होनी चाहिए। जबकि 20 फीसदी लोगों का मानना है कि इसके दायरे में आने वाली सर्विसेस घटाई जानी चाहिए। 30 फीसदी लोग इससे पूरी तरह छुटकारा चाहते हैं। वहीं 20 फीसदी लोग इसमें कोई परिवर्तन नहीं चाहते।

बजट में सरकार किस क्षेत्र को प्राथमिकता दे, इस पर 40 फीसदी लोग चाहते हैं कि शिक्षा पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए। जबकि 20 फीसदी का मानना है कि कृषि को बढ़ावा देकर ही देश की अर्थव्यवस्था मजबूत की जा सकती है। वहीं 40 फीसदी लोग स्वास्थ्य व इंफ्रास्ट्रक्चर की बेहतरी के पक्ष में हैं।

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