संडे स्पेशलः रफ्तार के दीवानों का नया सफर
शहला फाइज Sunday, July 05, 2009 11:19 [IST]  

विलासिता की बात लक्जरी कारों के जिक्र के बिना अधूरी रह जाएगी। रफ्तार से रेस लगाते पहियों के भारत में शुरू हुए पहले एक्सक्लूसिव सोशल नेटवर्किग क्लब के बारे में जानिए।

इस पहल का मकसद दुनिया की सबसे ज्यादा तेज रफ्तार मशीनों के मालिक और कारों का शौक रखने वालों को एक मंच पर लाना है। सुपर कार्स की इस विशाल श्रेणी में फरारी, ऑडी, बीएमडब्लू, लैंबोरगिनी और पोर्श के शानदार मॉडल्स को एक ही जगह देखा जा सकेगा।

सुपर कार्स का सुपर क्लब

Sports star हमारे देश में द सुपर कार क्लब ऑफ इंडिया (एससीआई) की पहल बेलसेट इंटरटेनमेंट, ऑटोकार इंडिया और उद्योगपति गौतम सिंघानिया के संयुक्त प्रयास का नतीजा है। इसे बेहद ही एक्सक्लूसिव मेंबर क्लब की तरह शुरू किया गया है और आगे भी इसी रूप में विकसित किया जाएगा।

टैक्सटाइल व्यवसायी और कारों के शौकीन गौतम सिंघानिया एससीआई के संरक्षकों में से एक हैं। गौतम कहते हैं, ‘यह आइडिया मुझे ऑटोकार के सोराबजी से बातचीत के दौरान आया। अगर इन कारों को देखकर किसी के भी चेहरे पर मुस्कान आ जाए तो मुझे खुशी होगी।

इस क्लब के अंतर्गत एक सी रुचि वाले लोग साथ आएंगे जिससे यह अपनी तरह का एक सोशल नेटवर्किग ग्रुप बन जाएगा। इसे यूके, यूरोप और अमेरिका के सुपर स्टार्स क्लब से जोड़कर कुछ गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।’

किसको मिलेगी पात्रता

इस क्लब की पात्रता लेने के लिए आपके पास एक सुपर कार और गौतम सिंघानिया की तरफ से निमंत्रण होना चाहिए। क्योंकि सदस्यता पूरी तरह ‘बाय इन्विटेशन’ की तर्ज पर मिलेगी। इस शो रूम में मौजूद रहने वाली कारों में रोल्स रॉयस फैंटम, कूपे, ऑडी आर 8, बेंटले कांटीनेंटल जीटी और निसान जीटीआर प्रमुख हैं।

जरूरी बात यह है कि आपकी कार की कीमत कम से कम एक करोड़ रुपए होना चाहिए। साथ ही कार के इंजन की क्षमता कम से कम 400 बीएचपी जरूर हो। मुंबई में फिलहाल इसके 20 ही सदस्य बनाए जाएंगे। दूसरे शहरों में इस क्लब के तहत 30 लोगों को सदस्यता दी जाएगी।

सेलिब्रिटी मालिक

rak jundra जिस तरह यह कारें अपने आप में नफासत और विलासिता का मिश्रण हैं, ठीक उसी तरह इनके मालिक भी नामचीन हैं। इनमें मुख्य तौर पर जॉन अब्राहम, राज कुंद्रा, संजय दत्त, सचिन तेंडुलकर, अजय देवगन, अक्षय किलाचंद, अदर और योहान पूनावाला, सनी दीवान, अनिल अंबानी और विजय माल्या शामिल हैं। इसके संस्थापकों का मानना है कि क्लब के 100 सदस्य बनने के बाद एक बार में अगर 30 भी साथ मंे आ पाए तो यह अच्छी बात होगी।

मंदी से बेपरवाह

वैश्विक मंदी का दौर भले ही जारी हो लेकिन एससीआई जैसे क्लब्स के गठन से इस बात पर यकीन करने में थोड़ी झिझक होना लाजिमी है। मौजूदा दौर में भारतीय अर्थव्यवस्था पिछले 6 वष्रो में सबसे धीमी रफ्तार पर है। फोब्र्स पत्रिका के अनुसार खरबपतियों की संख्या घटकर आधी हो गई है, लेकिन इन सब बातों से लक्जरी और स्पोर्टी कार का बाजार लगभग अनछुआ सा नजर आता है।

विंटेज एंड क्लासिक कार क्लब

दुनिया में विंटेज कारों का सबसे बड़ा काफिल भारत में ही है। सुपर कार क्लब तो अभी आया है लेकिन विंटेज कारों का क्लब कई वर्षो से मुंबई मंे है। इसकी शुरुआत प्राणलाल भोगीलाल ने देश की चुनिंदा कारों को सहेजने के मकसद से की थी। विंटेज कारों के मालिक इसके सदस्य बन सकते हैं।

इसमें तकरीबन 158 सदस्य हैं, जिनमें प्राणलाल भोगीलाल, डॉ विजय माल्या और शरद सांघी शामिल हैं। इसमें विंटेज कार व मोटरसायकल 1941-1960 निर्मित और क्लासिक श्रेणी में 1961-1970 तक की कारें शामिल की जाती हैं। इस क्लब के तहत हर वर्ष विंटेज रैली आयोजित की जाती है, जहां पुरानी कारों के शौकीन एकत्रित होते हैं।

विंटेज कार क्लब ऑफ मुंबई

car मुंबई में बने सपुर कार क्लब से बहुत पहले 1963 में रोनी खान ने 16 वर्ष की उम्र में विंटेज कार क्लब ऑफ मुंबई का गठन अपने मालाबार हिल्स, मुंबई के घर पर शुरू किया था। कारों के इस दीवाने के पास उस वक्त एक साथ 10 विंटेज कारें हुआ करती थीं, जो अब दूसरी अजीम-ओ-शान शख्सियतों के काफिले की शान बढ़ा रही हैं। जब कारों से जुड़े तीन संगठन मुंबई में ही हैं, तो ऐसे में महाराष्ट्र सरकार ने विंटेज कार म्यूजियम के निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन का आवंटन किया है।

अजय-संजय का कार प्रेम

संजय दत्त के कार के काफिले में यूं तो विभिन्न किस्म की सुपर कार हैं लेकिन खास बात यह है कि संजू बाबा की सभी कारों का रंग ब्लैक है। सुपर कार के साथ ही उनकी वेनिटी वैन भी ब्लैक ही है। अजय देवगन के पास घरेलू ब्रांड से लेकर सपुर लक्जरी कारें हैं। उनके पास टोयटा सेलिका, फरारी, मसरेटी, मर्सिडीज जेड क्लास और मारुति स्विफ्ट भी है।

कारों का रंगनामा

कार खरीदते वक्त उसके रंग को लेकर घर के कई सदस्य उलझते हैं। लेकिन इंश्योरंेस कंपनियां मानती हैं कि रेड, चमकदार ब्लैक और गहरी नीली कारें ज्यादा दुर्घटनाग्रस्त होती हैं, इसलिए इनका क्लेम बनने का आंकड़ा भी दूसरे रंगों के मुकाबले ज्यादा बनता है। लिहाजा कंपनियां इन रंगों के लिए ज्यादा प्रीमियम की मांग करने लगी हैं।

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