नई दिल्ली.
केंद्र सरकार आम बजट में विभिन्न विकास योजनाओं के लिए आवंटन बढ़ा सकती हैं। कोशिश यह होगी कि बजट में इन योजनाओं को ज्यादा से ज्यादा धनराशि देकर वैश्विक मंदी से मुकाबला करने के साथ रोजगार भी पैदा किया जाए।
एक अनुमान के मुताबिक, सामाजिक और ढांचागत क्षेत्र की योजनाओं में नब्बे प्रतिशत अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराई जानी चाहिए। सूत्रों के अनुसार योजना आयोग के साथ विचार-विमर्श के बाद सरकार ऐसी योजनाओं के लिए 2009-10 के पूर्ण बजट में अंतरिम बजट की तुलना में करीब 35-40 हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त उपलब्ध करा सकती है। इसके साथ ही विकास संबंधी अन्य योजनाओं के लिए अस्सी हजार करोड़ रुपए तक के व्यय का प्रावधान किए जाने की उम्मीद है।
सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) को अंतरिम बजट की तुलना में करीब 9-10 हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त उपलब्ध कराए जाने की उम्मीद है। इसी तरह राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन को भी अंतरिम बजट के 12,070 करोड़ रुपए की तुलना में करीब 1 हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
शहरी नवीनीकरण योजना :
जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीनीकरण योजना को लगभग 1200 करोड़ रुपए अतिरिक्त दिए जा सकते हैं। इसमें से अधिकांश राशि शहरी गरीबों को आवास उपलब्ध कराने पर खर्च किए जाने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना को भी अंतरिम बजट के छह हजार करोड़ रुपए की तुलना में इस बार एक से डेढ़ हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
स्वास्थ्य सुरक्षा योजना :
प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना को भी करीब एक हजार से बारह सौ करोड़ रुपए अतिरिक्त उपलब्ध कराए जाने की उम्मीद है। योजना के तहत एम्स जैसे छह नए अस्पताल और 13 सरकारी मेडिकल कॉलेजों को एम्स जैसा बनाया जाना प्रस्तावित है। सूत्रों के अनुसार सर्वशिक्षा अभियान, मिड-डे मील और ग्रामीण स्वच्छता अभियान को कितनी राशि बजट में उपलब्ध कराई जाएगी इस बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।