वेतन में से पेंशन के नाम से जो पैसा काटा जाता था, वह उस समय के हिसाब से था। अब जब पेंशन के पैसे मिलने शुरू हुए तो इस महंगाई के हिसाब से पैसे काटे जा रहे हैं। आजकल आम आदमी को पेंशन 800 से 1000 रुपए मिलती है, ये पैसे तो हर महीने की सब्जी-भाजी में ही खर्च हो जाएंगे।
घरेलू महिला का रोना: आज के समय में हिसाब लगाया जाए तो हरी सब्जी ही 30 रुपए प्रति किलो में मिल रही है। सुना है कुछ दिनों में 3-4 रुपए और बढ़ने वाले हैं। घर में कम से कम छह सदस्य तो होते हैं- सास-ससुर, पति-पत्नी और दो बच्चे। इन सबके नाश्ते में ही सब्जी का अता-पता नहीं रहता। लंच बॉक्स तो दूर की बात है।
धनिया 185 रुपए किलो मिल रहा है। हम तो क्या अच्छे खासे कमाने वाले लोग भी धनिया खरीदने की सोच नहीं पा रहे हैं। डीजल-पेट्रोल की कीमतें बढ़ गई, ट्रांसपोर्टर ने अपने पैसे बढ़ा दिए। इसका हर्जाना आम आदमी भुगत रहा है।
कॉलेज जाने वाली छात्रा : पहले पापा से गाड़ी के पेट्रोल के लिए 600 रुपए मांगा करती थी, अब 800 रुपए मांगने पड़ेंगे। पेट्रोल की कीमत जो बढ़ गई है। ऊपर से किताबें, फीस का खर्च अलग। इस साल तो मंदी की वजह से पापा की आय में बढ़ोतरी भी नहीं हुई।
इनकम वही रही, खर्च बढ़ते गए। आज से छह महीने पहले जब पेट्रोल की कीमतें कम कर दी गईं थीं तो मैंने हर माह के हिसाब से एक-दो हजार रुपए बचा लिए थे। पर अब पेट्रोल की कीमतें रातों-रात बढ़ा दी गईं। पापा को परेशान नहीं करूंगी। भई, आम लोगों में शामिल हूं। सरकार का फरमान सर आंखों पर।
इंतजार कर रही हूं जल्दी कमाने लगूं और अपना खर्च खुद उठाऊं। क्या सरकार हम जैसे कॉलेज गोइंग छात्रों के लिए कुछ नहीं सकती? समझ नहीं आता वित्त मंत्री जी ने इसमें छात्रों का ध्यान क्यों नहीं रखा।