बजट पर उद्योग जगत के दिग्गजों की राय
भास्कर नेटवर्क Tuesday, July 07, 2009 17:39 [IST]  

bnनिवेश के लिए मौके मिलेंगे

दिनेश ठक्कर, सीएमडी, एंजेल ब्रोकिंग

बाजार की उम्मीदों के मुताबिक इस बार का बजट निराशाजनक रहा है। करों में भी किए गए सुधार उतने नहीं हुए जिनकी आस बजट से की जा रही थी। यही वजह है कि बजट के बाद शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी गई।

लेकिन उम्मीद की जा रही है कि सरकार कारपोरेट जगत के लिए बजट से अलग अपने प्रयास जारी रखेगी। ऐसे में अगर निवेश की सोचें तो इन्फ्रास्ट्रक्चर, आईटी और एफएमसीजी अच्छे साबित हो सकते हैं।

बजट में मैट रेट को 10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी किया गया है। ये कंपनियों के 80 आईए के फायदों के दावों पर जरूर असर डालेगा। इस सेक्टर में को मिला आवंटन इसे निवेश के लिए बेहतर विकल्प बनाता है। इस सेक्टर में निवेश के लिए रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और आईवीआरसीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर बेहतर हो सकते हैं।

इस बार के बजट में बैंकिंग सेक्टर के लिए कुछ भी नहीं है। लेकिन जीडीपी में सुधार होने पर सबसे ज्यादा फायदे में रहने वाले सेक्टरों में बैंकिंग सेक्टर होगा। निवेश के लिहाज से ये सेक्टर अच्छा हो सकता है।

एसटीपीआई स्कीम को एक साल के लिए बढ़ाया जाना आईटी सेक्टर के लिए फायदेमंद होगा। पैकेज्ड सॉफ्टवेयर पर सीमा शुल्क भी हटा लिया गया है। इससे कंपनियों के व्यापार का खर्चा घटेगा। इसलिए इस सेक्टर में निवेश किया जा सकता है।

इन्फोसिस, टीसीएस और विप्रो जैसी कंपनियां लंबे समय के निवेश के लिए सही हो सकती हैं। इसके साथ ही आरट्रॉनिक्स और थ्रीआई इंफोटेक जैसी मिडकैप भी निवश के लिए अच्छा विकल्प हो सकती हैं। एफएमसीजी एक और सेक्टर है जिसे बजट से अच्छा फायदा होने की उम्मीद है।

भारी रहा उम्मीदों का वजन

निर्मल जैन, एमडी, इंडिया इंफोलाइन

शेयर बाजार में अफवाहों के आधार पर खरीदी काफी समय से होती आ रही है। लगता है कि बाजार ने बजट को लेकर कुछ ऐसी ही प्रतिक्रिया की है। वित्तमंत्री से काफी उम्मीदें पाल ली थीं क्योंकि लंबे अरसे के बाद उन पर गठबंधन का कोई दबाव नहीं था।

यूपीए और एनडीए की सरकार ने पिछले जो दस बजट पेश किए उनमें गठबंधनों के दबाव साफ नजर आते थे। पहली बार वित्त मंत्री के सामने साफ स्लेट थी। वह इस पर कोई अहम बात लिखने में विफल रहे। कमोबेश सारे ड्रीम बजट ऐसे वित्तमंत्रियों ने पेश किए हैं, जिनसे बहुत कम उम्मीदें थीं।

चुनावों के बाद शेयर बाजार में रैली एक धमाकेदार बजट की आस में दिखाई दी। दूसरा पक्ष देखें तो यूपीए को लोकप्रियतावादी एजेंडे के हिसाब से वित्त मंत्री के पास बहुत कम जगह थी।

उन्होंने कम से कम नई योजनाओं की घोषणा की, ग्रामीण इलाकों पर खर्च दिखाया, बुनियादी ढांचे के विकास और भारत निर्माण पर उनकी योजनाओं में काफी प्रावधान थे। देखें तो फ्रिंज बेनिफिट टैक्स और कमोडिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (सीटीटी) का खत्म होना अच्छे कदम थे।

वित्त मंत्री ने टैक्स बढा़ने के मसले पर भी काफी संयम से काम लिया। कंपनियों के लिहाज से देखें तो मैट बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया, जो उन पर भारी पड़ेगा। जीएसटी लागू करना भी एक सकारात्मक कदम होगा, क्योंकि अब अप्रत्यक्ष करों का ढांचा काफी सरल हो गया है।

यूनिक आइडेंटिटी परियोजना के लिए 120 करोड़ रुपए का प्रावधान दिखाता है कि नीलकेणि की नियुक्ति के बाद भी बजट प्रावधानों के बाद भी परियोजना जल्दी होती नहीं दिखती। सबसे नकारात्मक पहलू तो यही है कि घाटे की भरपाई का कोई तरीका नहीं दिखाया गया है।

सच्चई से परे थी उम्मीदें

उदय कोटक, एमडी, कोटक महिंद्रा बैंक

मैं साफतौर पर मानता हूं कि बाजार और व्यापारी इस बजट से कुछ ज्यादा ही उम्मीदें लगाए बैठे थे। पर वित्त मंत्री ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के इस बजट से दलाल स्ट्रीट को केवल निराशा हाथ लगी है।

उम्मीद है कि आने वाले वक्त में वित्त मंत्री इस निराशा को आशा में बदलने की कोई सार्थक कवायद करेंगे। यह बजट 1980 के दशक के बजटों के जैसा है जो आंकड़ों की बातें ज्यादा करता है और जरूरत के हिसाब से क्षेत्रों को सुविधाएं कम मुहैया कराता है।

यह बजट किसी बड़ी तस्वीर का अक्स भी नहीं है। ना ही इस बजट में किसी दृष्टिकोण का परिचय मिलता है। संक्षेप में कहूं तो यह बजट मोटे तौर पर निराश ही करता है। खासकर सरकार द्वारा पिछले एक महीने में जो मुद्दे उठाए गए हैं, जैसे शिक्षा, ऊर्जा, महंगाई पर सरकार का जो रुख रहा है।

वह इस बजट में दिखाई नहीं देता। वैसे मैं इस बजट से निजी तौर पर सारी समस्याओं का समाधान नहीं मान रहा हू, पर मेरा यह मानना है कि वित्त मंत्री का एडीआई जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर कोई अहम बयान न देना, बाजार को कमजोर कर सकता है।

यह वक्त है जब सरकार को और उद्योगों को मिलजुल कर काम करना होगा और साथ ही आने वाली समस्याओं से निपटना होगा। हमें बाजार और उद्योग की वास्तविकताओं को ध्यान में रखना होगा। खासकर नीतियां बनाते या घोषित करते समय।

मुझे लगता है निवेशकों के लिए देश का माहौल तो काफी अच्छा है। जरुरत है उसे प्रोत्साहित करने की। उम्मीद है कि वित्त मंत्री भविष्य में इस कमी को पूरा जरूर करेंगे। मेरा ये मानना है कि बजट से पैदा हुई निराशा पर भी वित्त मंत्री गौर करेंगे और निवेश और बाजार पर नई परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे। बाजार सच्चई से काफी दूर चला गया था।

काफी उम्मीदें जगा ली गई थीं। इससे निराशा हुई है। लेकिन निराशा अल्पकालिक है। मध्यम अवधि में यह निवेश का बहुत अच्छा मौका है। वित्त मंत्री का इंफ्रास्ट्रक्चर पर अधिक फोकस करना इसी बात को दर्शाता है। जब तक देश का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत नहीं होगा, तब तक विनिवेश के लायक माहौल भी सही ढंग से बन नहीं पाएगा। मुझे लगता है निर्यात वृद्धि के लिए किए जाने वाले उपायों में भी यह संभावना छिपी है कि वह बाजार को विकसित करने में खासे मददगार हो। इसके अलावा वैश्विक मंदी से निपटने के लिए किए जाने वाले उपायों का भी अपना महत्व है।

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