भोपाल. प्रदेश की सरकारी मशीनरी में ऊर्जावान युवा और अनुभवी लोगों का संतुलन बुरी तरह गड़बड़ा गया है। सरकारी सेवाओं में 35 वर्ष तक की उम्र के अधिकारी-कर्मचारी महज 17.8 फीसदी हैं।
इसके विपरीत 27.7 फीसदी अधिकारी-कर्मचारी 50 की उम्र को पार कर चुके हैं। आने वाले चार-पाचं वर्र्षो में प्रदेश की सरकारी व्यवस्था में अनुभवी हाथों का संकट खड़ा होने वाला है जब हजारों कर्मचारी सेवानिवृत्त होंगे। हाल ही में जारी आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट ‘प्रशासनिक क्षेत्र में नियोजन’ आने वाले कुछ वर्र्षो में सरकारी क्षेत्र में खड़ी होने वाली दिक्कतों की ओर भी इशारा कर रही है। इसके अनुसार अगले चार वर्र्षो में 56586 अधिकारी-कर्मचारी सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
इनमें सबसे अधिक संख्या विभागों की रीढ़ माने जाने वाले तृतीय श्रेणी कर्मचारियों की रहेगी। 40 वर्ष से ऊपर वाले कर्मचारी 68 फीसदी हैं। दूसरी तरफ पिछले वर्र्षो में नियमित पदों पर भर्ती नहीं होने से हर स्तर पर बड़ा अंतर पैदा हो गया है जिससे कई विभागों में अनुभवी लोगों का टोटा पड़ रहा है। मसलन मंत्रालय में बजट के जानकार चुनिंदा कर्मचारी रह गए हैं। वन विभाग में योजना का काम देखने वालों की कमी है तो विभागीय जांच के विशेषज्ञ अफसर ढूंढ़े नहीं मिल रहे हैं। एक कर्मचारी के अनुसार अगर संचालनालयों से जुड़े अधिकारी-कर्मचारियों की सेवाएं न ली जाएं तो मंत्रालय में कई विभागों का काम ही ठप पड़ जाए।
- सरकारी सेवाओं में असंतुलन के कारण नेतृत्व करने वालों का संकट खड़ा हो सकता है। एक दौर ऐसा आ सकता है जब हर स्तर पर नए लोग ही होंगे। भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए नियुक्तियां नहीं होने से इस तरह की स्थिति निर्मित होती है। - एससी बेहार, पूर्व मुख्य सचिव