भोपाल. रायसेन जिले में हरे-भरे पहाड़ों की गोद में भीमबैठका से मिलती-जुलती करीब एक किलोमीटर लंबी खूबसूरत और हैरतअंगेज गुफा ने सरकार के नुमाइंदों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अंदरूनी चट्टानों पर हनुमान और शिव के चरणों की आकृतियां हैं और भीतर घनघोर अंधेरे में वातानुकूलित वातावरण का मनोरम अहसास होता है।
बरेली तहसील के पाटनी गांव में स्थित यह मृगेंद्रनाथ की गुफा के रूप में स्थानीय लोगों के बीच जानी जाती है। संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने पुरातत्व विभाग की एक टीम पहले इस गुफा के अवलोकन के लिए भेजी थी, जिसकी रिपोर्ट मिलने के बाद वे खुद चुनिंदा अफसरों के साथ गुफा की गहराइयों में जा पहुंचे। संस्कृति सचिव मनोज श्रीवास्तव, पुरातत्व आयुक्त जेएल मालपानी भी उनके साथ थे।
महंत हरिदास एवं कई स्थानीय ग्रामीण भी इस दल में शामिल हुए। भीमबैठका से इसकी दूरी करीब 80 किमी है। करीब एक किमी की लंबाई की यह गुफा सौ मीटर नीचे उतरने के बाद कई जगह इतनी संकरी है कि चट्टानों के बीच चिपककर आगे जाने देती है। लेकिन बीच में काफी चौड़े खुले और अंधेरे स्थान भी हैं, जहां दिन की रोशनी का पता ही नहीं चलता। पत्थर पर कई आकर्षक आकृतियां भी नजर आती हैं। पुरातत्व के जानकारों का अनुमान है कि शैलचित्रों के लिए मशहूर भीमबैठका से इसका संबंध अवश्य ही रहा होगा।