Bhopal
रेलवे स्टेशन पर दिए थे पेपर
Bhaskar Correspondent Monday, July 13, 2009 02:35 [IST]  

भोपाल. राजधानी पुलिस को सूचना होने के बावजूद शहर में पीएमटी के नकली प्रश्नपत्रों की सौदेबाजी हो गई और स्थानीय पुलिस हाथ मलती रह गई। यदि पुलिस सतर्क रहती तो प्रश्नपत्र बेचने वाले परीक्षा के पहले ही पकड़े जा सकते थे। इंदौर के एक डॉक्टर को पीएमटी के नकली प्रश्नपत्र भोपाल रेलवे स्टेशन पर ही दो युवकों ने दिए थे।

पीएमटी के प्रश्नपत्रों की सौदेबाजी के मामले में इंदौर और दिल्ली में पकड़े गए डॉक्टरों से पूछताछ में लगातार नई जानकारियों का खुलासा होता जा रहा है। दिल्ली से पकड़े गए डॉ. गोपाल मोदी ने पीएमटी का पर्चा देने वालों में एक इंजीनियर व जबलपुर के कोचिंगवाले का नाम लिया। दोनों ने उसे पर्चे भोपाल रेलवे स्टेशन पर दिए थे। पुलिस ने इंजीनियर को हिरासत में ले लिया है और कोचिंग वाले की जबलपुर में तलाश की जा रही है।

इंदौर में सीएसपी गिरीश सूबेदार के निर्देशन में टीआई जयंत राठौर की टीम ने डॉ. मोदी से महत्वपूर्ण जानकारियां निकाली हैं। उसने बताया 3 जुलाई को पीएमटी के पर्चे भोपाल रेलवे स्टेशन पर इंजीनियर विपुल सक्सेना मूल निवासी सारंगपुर तथा जबलपुर में कोचिंग चलाने वाले संजीव केवट ने दिए थे।

पेपर का सौदा पचास लाख रुपए में तय किया था। विपुल इस समय इंदौर पुलिस की कस्टडी में है। उससे पूछताछ करने के बाद पुलिस दल उसे लेकर संजीव की तलाश में जबलपुर रवाना हो गया।

सिलेक्शन न होने से निराश था

डॉ. मोदी ने पुलिस को बताया वह पीजी करना चाहता था। इसके लिए उसने कई बार परीक्षा भी दी, लेकिन 96 अंक आने के बावजूद उसका सिलेक्शन नहीं हुआ। जब वे लोग पेपर देते थे, तब खबर मिलती थी कि पेपर लीक हो गए। उसने ऐसे लोगों का सिलेक्शन होते देखा, जो पढ़ने में कमजोर थे। इससे उसने सोच लिया कि वह भी पेपर बेचकर रुपए कमाएगा।

निजी मेडिकल कॉलेज में हुई दोस्ती

डॉ. मोदी और विपुल की दोस्ती एक निजी मेडिकल कॉलेज के रिसेप्शन पर हुई थी। डॉ. मोदी ने वहां कुछ समय डिमांस्ट्रेटर का काम किया था। कॉलेज के रिसेप्शन पर सारंगपुर का ही रितेश विश्वकर्मा बैठता था। एक ही शहर का होने से उसकी और विपुल की दोस्ती थी। उसने ही विपुल को डॉ. मोदी से मिलवाया।

टूट गया था सौदा

डॉ. मोदी के मुताबिक जब उसने पेपर दिलाए जाने की बात विपुल से की तो उसने संजीव का नाम लेते हुए उससे मुलाकात कराई। उसके बाद डॉ. मोदी ने ग्वालियर के कोचिंग वाले से 35 लाख में सौदा तय कर लिया। फिर दिल्ली के डॉ. विनय के मार्फत इंदौर में 55 लाख में सौदा किया। 3 जुलाई को विपुल और संजीव से पेपर लेने के बाद 4 जुलाई की सुबह उसने ग्वालियर की कोचिंग वाले से बात की तो उसने यह कहकर सौदा तोड़ दिया कि उसे वहीं पेपर मिल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक विपुल ने संजीव और डॉ. मोदी से पहचान होने की बात तो कबूल कर ली, लेकिन पर्चाकांड में अपना रोल होने से इंकार कर दिया। पुलिस इसकी तस्दीक कर रही है।

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