भोपाल. परिवहन विभाग राजधानी सहित प्रदेश में चलने वाली सभी बसों पर नजर रखने के लिए उनमें ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) लगाने पर विचार कर रहा है। दिल्ली में केंद्रीय भूतल एवं परिवहन मंत्रालय के अधिकारियों के साथ प्रमुख सचिव परिवहन राजन एस कटौच और परिवहन आयुक्त एनके त्रिपाठी के साथ हुई चर्चा में इस मुद्दे पर सहमति भी बन गई है।
केंद्र सरकार से तकनीकी मामलों के लिए इस व्यवस्था के लिए शुरू में पांच करोड़ रुपए दिए जाने का आश्वासन भी परिवहन विभाग को मिल गया है। तकनीक का उपयोग प्राथमिकता के अधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित होने वाली बसों पर नियंत्रण के लिए किया जाएगा। इस तकनीक के बाद दूरदराज की यात्रा करने वाले यात्रियों को बसें आधे रास्ते पर छोड़कर नहीं लौट सकेंगी।
यह है तकनीक
ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) इंटरनेट पर आधारित तकनीक है। इसका मुख्य सर्वर, जिसे रिसीवर भी कहते हैं, किसी स्थान विशेष पर कंट्रोल रूम बनाकर स्थापित कर दिया जाता है। इसके बाद जिस बस या गाड़ी आदि के विषय में जानकारी रखना हो, उसमें साफ्टवेयर चिप लगा दिया जाता है। इस चिप के जरिए कंट्रोल रूम को पता रहता है कि बस या गाड़ी की लोकेशन क्या है।
यह फायदा होगा
जब यह तकनीक बसों में लगा दी जाएगी तो ऑपरेटरों को पूरे रूट तक अपने वाहन ले जाना पड़ेंगे और वह आधे रास्ते से नहीं लौट सकेंगे।
लगेंगे डिस्प्ले बोर्ड
जीपीएस सिस्टम लगने के बाद प्रत्येक बस स्टैंड पर जब यह जानकारी रहेगी कि कौनसी बस, किस वक्त, कहां है, तो उससे संबंधित जानकारी देने के लिए डिस्प्ले बोर्ड भी लगा दिए जाएंगे।
रिजर्वेशन व्यवस्था भी होगी शुरू
जब सभी बसों की जानकारी कंट्रोल रूम और बस स्टैंड पर होगी तो उनमें बैठने वाले यात्रियों की संख्या भी पता रहेगी। इससे बसों में रिजर्वेशन व्यवस्था भी शुरू की जा सकेगी।