भोपाल. समलैंगिकों को चाहिए कि वे भारतीय संस्कृति व सामाजिक व्यवस्थाओं को दागदार न करें। भारत में समलैंगिकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे लोगों को चाहिए कि वे भारत छोड़ दें। यह चेतावनी रविवार को धर्म संसद के आयोजन में विभिन्न समुदायों के लोगों ने दी।
बड़ी झील स्थित दरगाह के करीब रविवार को धर्म संसद का आयोजन अभा मुस्लिम त्यौहार कमेटी की प्रदेश इकाई द्वारा किया गया था। कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. औसाफ शाहमीरी खुर्रम की अगुवाई में आयोजित धर्म संसद में सिख समाज के ज्ञानी दलीप सिंह ने कहा कि समलैंगिकता को किसी भी हाल में कानूनी रूप से मान्यता नहीं मिलनी चाहिए। समलैंगिकता के कारण कई परिवार बर्बाद हो सकते हैं। इसे रोका जाना चाहिए।
सूफी संत समाज के रिजवान अली शाह ने कहा कि वे समलैंगिकों को अछूत का दर्जा देते हैं। ऐसे लोगों का देशभर की दरगाहों में प्रवेश रोका जाएगा। डॉ. खुर्रम ने कहा कि समलैंगिकता अप्राकृतिक कृत्य है। इस्लाम समेत सभी धर्मो के लोगों ने इसे अवैध और इंसानियत के खिलाफ माना है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को भारत छोड़ कर पश्चिमी देशों में चले जाना चाहिए।
अंजुमन मुस्लिम ख्वातीन सोसायटी की मुनव्वर जहां, व शहनाज बेग ने कहा कि समलैंगिकता के खिलाफ वे महिलाओं की आवाज बुलंद करेंगी। यह एक बड़ी सामाजिक बुराई है। इसे रोकना होगा।
इसाई समाज के जार्ज जोसफ ने कहा कि समलैंगिकता को मान्यता दी गई तो फिर मैरिज एक्ट को भी बदलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि समलैंगिकता यौन रोगों को भी जन्म देती है। आर्य समाज के वीरेंद्र कुमार व स्वामी प्रज्ञानंद महाराज ने भी समलैंगिकता के विरोध में विचार व्यक्त किए। डॉ. खुर्रम ने बताया कि इस धर्म संसद ने सर्व सम्माति से निर्णय लिया है कि वे राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर मांग करेंगे कि दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा समलैंगिकता को वैध करार देने के फैसले को निरस्त कराया जाएगा। साथ ही समलैंगिकों के खिलाफ मुहिम चलाकर उनसे देश छोड़ने को कहा जाएगा।