तो आपके दुलारे टाइगर हिल्स पर उछल कूद करेंगे
उपमिता वाजपेयी Thursday, July 30, 2009 17:24 [IST]  

tourismअब वह दिन दूर नहीं जा आप तोलोलिंग, मश्को वैली की वादियों में सैर कर रहे होंगे। टाइगर हिल्स पर आपके बच्चे उछल कूद रहे होंगे और हर साल छुट्टियां मनाने के लिए तैयार की गई लिस्ट में कारगिल-द्रास भी जगह ले लेंगे।



जम्मू-कश्मीर सरकार कारगिल द्रास को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने जा रही है। अब तक केवल युद्ध के मैदान के रूप में पहचीनी जाने वाली यह जगह टूरिज्म स्पॉट के तौर पर देश दुनिया में मशहूर हो जाएगी। इसका अंदाजा यहां बढ़ रही पर्यटकों की संख्या से लग रहा है।



शिमला कुल्लू मनाली जाने वाले पर्यटक अब कारगिल और लेह का रूख कर रहे हैं। देश के ही नहीं विदेशी पर्यटक भी अब यहां आने में खासी रूचि ले रहे हैं।



हॉलैंड से यहां आए सीज और मेमो बताते हैं कि भारत-पाक समस्या औक आतंकवाद के बारे में उन्होंने बहुत कुछ सुना था, लेकिन यहां आने में उन्हें किसी तरह का डर नहीं लगा। श्रीनगर से लेह जाते समय मेमो खुद को कारगिल में समय बिताने से रोक नहीं सके। आम तौर पर लेह आने वाले सभी पर्यटक श्रीनगर जाते हुए एक दिन कारगिल में रात रुकते हैं और इसके बाद ही आगे की यात्रा पर बढ़ते हैं।



कारगिल के आसपास दर्शनीय स्थल
लेह आने वाले ज्यादातर पर्यटक कारगिल, जक्सर, बटालिक और दारदिस्तान भी जाना पसंद करते हैं। लद्दाख, लेह के अलावा जोजिला पास, मश्को वैली और अब कारगिल भी जम्मू-कश्मीर के टूरिस्ट स्पॉट के रूप में विकसित हो रहा है। कारगिल के आसपास द्रौपदी कुंड, भीमपत्थर, नुनकुन की पहाड़िया, कारगिल से 45 किमी दूर मुल्बेक चंबा स्तूप, मैत्रीय बुद्दा साकू और रंगडम लेक काफी प्रसिद्ध जगह हैं।



कारगिल युद्ध से मशहूर हुई टाइगर हिल्स को सरकार टूरिस्ट स्पॉट के रूप में विकसित करने का प्लान बना रही है।



भारतीय पर्यटकों के लिए कारगिल और यहां के विशेष पोस्ट भी आकर्षण का केंद्र बनते जा रहे हैं। अब वह दिन दूर नहीं जब देशभक्ती की कहानियों वाला यह टूरिस्ट स्पॉट होगा।



यहां तक पहुंचने के लिए आप प्राइवेट टैक्सी या फिर बस ले सकते हैं। लेह या श्रीनगर से कारगिल तक का टैक्सी किराया 6000 रुपए के आसपास होता है वहीं बस 140 रुपए प्रति व्यक्ति किराया लेती है।



कारगिल में अब कई छोटे बड़े होटल आकार ले रहे हैं। यहां के युवा भी गाइड की भूमिका में रोजगार तलाश रहे हैं। युद्ध के दौरान यहां के सभी होटल वाले होटल बंद कर आसपास के सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे। केवल कारगिल का सियाचीन होटल उस वक्त भी खुला रहा था। युद्ध कवर करने आए पत्रकारों के लिए सियाचीन होटल ही एक मात्र सहारा था।



कारगिल के 30 साल पुराने कैरवान होटल के मालिक मो. इलियास के अनुसार कारगिल आने वाले ज्यादा तर लोग केवल एक रात यहां ठहरते हैं और आगे की यात्रा के लिए निकल जाते हैं।

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