वाशिंगटन अमेरिका ने गुरुवार को कहा है कि पाकिस्तानी नेताओं ने बलूचिस्तान में भारत के कथित हस्तक्षेप का मामला तो उठाया है, लेकिन अपने दावे के समर्थन में उन्होंने कोई पुख्ता सबूत मुहैया नहीं कराया है।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लिए अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि रिचर्ड हॉलब्रुक से जब उनकी पाक यात्रा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने संवाददाताओं को बताया, ‘अगर मैं कहूं कि यह मुद्दा नहीं उठाया गया तो मैं गुमराह करूंगा।’ हॉलब्रुक के अगस्त के मध्य में भारत आने की संभावना है।
कश्मीर अधिकार क्षेत्र से बाहर : यह पूछे जाने पर कि बलूचिस्तान में भारत के कथित हस्तक्षेप के संबंध में उन्हें कोई पुख्ता सबूत दिया गया है, उन्होंने कहा, ‘आपके प्रश्न का छोटा सा जवाब है नहीं।’ उन्होंने इस संबंध में आगे कुछ नहीं कहा। हॉलब्रुक ने दोहराया कि कश्मीर पर चर्चा उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
भारत के लिए विशेष स्थान : एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के मुद्दे पर भारत से कोई मतभेद नहीं है। अमेरिकी दूत ने कहा, ‘आप जानते हैं कि भारत दुनिया का पहला देश है, जिसे मैं जानता था। उसके लिए मेरे दिल में विशेष जगह है और अगर कोई मतभेद है तो इस बारे में आप भारतीयों से पूछिए। मैंने कोई मतभेद नहीं देखा।’
ऐतिहासिक तैनाती : हॉलब्रुक ने तालिबान और अलकायदा से लड़ने के लिए पूर्वी से पश्चिमी सीमा पर सेना तैनात करने पर पाकिस्तानी नेतृत्व की तारीफ भी की। उनके मुताबिक, यह एक ऐतिहासिक तैनाती है।
खाड़ी देशों से मिलती है मदद : एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने बताया कि इसके पुख्ता सबूत हैं कि क्षेत्र में आतंकियों को खाड़ी देशों से पैसा मिलता है और इस पर नियंत्रण पाना काफी मुश्किल है।
पाक में बंटे हजारों हथियार : पाकिस्तान में नियमों को ताक पर रखकर गलत तरीके से हजारों हथियार अज्ञात लोगों को बांटे जाने से सरकार की नींद उड़ गई है। हथियार घोटाले में शामिल गृहमंत्रालय के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन जांचकर्ता बांटे गए हथियारों की संख्या का पता नहीं लगा पाए हैं।