‘लव आज कल’ : लव में प्यार की तलाश
RAJESH YADAV Friday, July 31, 2009 19:30 [IST]  

निर्देशक : इम्तियाज अली

निर्माता : सैफ अली खान, दिनेश विजान

कलाकार : सैफ अली खान, दीपिका पादुकोण, ऋषि कपूर, नीतू सिंह, राहुल खन्ना

गीतकार : इरशाद कामिल

फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली की बहुचर्चित फिल्म ‘लव आज कल’ माडर्न जनरेशन के लव और पुरानी पीढ़ी के प्यार की तलाश है। दरअसल ‘लव आज कल’ में  सच्चें प्यार की तलाश है और दिलों में बैठे शब्द रहित प्यार की तलाश है। फिल्म प्यार की बात करती है और इसमें समय के साथ आए बदलाव की।


जब वी मेट की सफलता के बाद इम्तियाज अली से उम्मीदें बढ़ गई थी लेकिन ‘लव आज कल’दर्शकों के दिल पर चोट करने वाली फिल्म है। यह एक ऐसी फिल्म है जिसको देखने के बाद दर्शक यह कहते हुए बाहर निकलता है ऐसा तो सोचा न था। दरअसल जब निर्देशक अपनी पिछली सफल फिल्मों के मोह से उभर नही पाए तो उससे ज्यादा उम्मीद करना न्यायसंगत बात नहीं होगी।

इस बात में कोई शंका नहीं कि फिल्म का संगीत और गीत दर्शकों को मनोरंजन करने में सक्षम है लेकिन फिल्म में जिस प्यार की बात की जा रही है दरअसल उसकी कोई कहानी तो होनी चाहिए ना। फिल्म की स्टोरी लाईन में कोई दम नहीं है और ऐसा लगता है कि निर्देशक प्यार को लेकर बेहद असमंजस की स्थिति में रहा है। चाहे आज का जमाना हो चाहे कल का क्या कोई लड़की अपने विवाह के दूसरे दिन ही कहे कि मैं तुमसे नहीं किसी और से प्यार करती हूं और मैंने आपके साथ विवाह कर गलती की?

फिल्म में एक तरफ आज के जमाने का प्यार है जिसमें जय (सैफ), मीरा (दीपिका पादुकोण) आज के जमाने के प्रेमी है जिनके लिए प्यार दैहिक संबंधों के ताप से ज्यादा कुछ नहीं है। पार्ट टाइम जॉब की तरह भावना रहित मोहब्बत में ब्रेकअप जैसी बातें बड़ी सामान्य बात मानी जाती है।

वहीं दूसरी तरफ ‘लव आज कल’ में 1965 की एक और प्रेम कहानी को दिखाया गया है जिसमें वीर सिंह एक ऐसे युवक के रुप में है जो हर्लिन कौर को देखकर दीवाना हो जाता है और शपथ लेता है कि इस जन्म में और अगले हर जन्म में यही मेरी वोट्टी बनेगी। फिल्म कल के इस प्यार और आज के प्यार के बीच आगे बढ़ती है और इसमें सूत्रधार के रुप में वीर सिंह (ऋषि कपूर )आज के प्रेमी जय (सैफ अली खान) को उसके दिल में छुपे सच्चे प्यार को बताने की कोशिश करता है। फिल्म आगे चलकर तमाम उतार -चढ़ाव के बाद सच्चे प्यार को सलाम करती हुई और इंसान के दिल में छुपे प्रेम को बताने की कोशिश है। लेकिन इसे फिल्मानें में संवादों को बोझिल होना , कहानी में भटकाव दर्शक का ध्यान भंग करने के लिए काफी है जो फिल्म को औसत दर्जे की बनाता है।

जहां तक कलाकारों की बात है तो सैफ अली खान और दीपिका पादुकोण दोनों ने निराश किया है और संवाद बोलते समय जिस भावप्रणय अभिनय की जरूरत थी वह नदारद है। इम्तियाज अली के  निर्देशन में कलाकारों को इतना भाव शून्य देखना आर्श्चर्य में डालता है।

खैर इन सब बातों के अलावा बेहतरीन संगीत के लिए आप प्रीतम को साधुवाद दे सकते है और चोर बाजारी और आहूँ -आहूँ जैसे गीत दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करने में सक्षम है। संगीत रचना में पुरीने दौर के संगीत और आज के दौर के संगीत को मिलाने  प्रयास उम्दा है जो फिल्म का सबसे सजीव पक्ष कहा जा सकता है।

दरअसल फिल्म निर्देशक इम्तियाज ने फिल्म के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया है कि कुछ लोग प्यार के लिए मिशाल बन जाते हंै और कुछ इसे खेल समझते, यह एक सच है और इसे आप झुठला नहीं सकते। एक सिक्के के हेड और टेल, समय के दिन और रात की तरह प्यार भी दो रूपों में सामने आता है जहां एक तरफ प्रेम के लिए जान देने की जिद है तो दूसरी तरफ इसे खेल मानकर भावनाओं के साथ छलावा भी देखा जाता है। खासकर आजकल का युवा जो बंधनों से दूर भागने की कोशिश करता नजर आता है, लेकिन यह तस्वीर का एक पक्ष है जरा इस युवा दिल में झांककर देखिए वहां प्यार की कशिश और उत्तेजना जरूर दिखलाई पड़ जाएगी।

आज की पीढ़ी भावना से परे जाकर फैसले लेने की जिद जरूर करती है लेकिन सच्चे प्यार का ज्वार भाटा तो यहां भी है, क्योंकि ऊपर वाले उस खुदा ने जो इंसान के सीने में दिल बांटने में जरा भी कंजूसी नहीं की। फिल्म ऐसे ही सच्चे प्यार की खोज करती है लेकिन इन सब बातों के बावजूद इसमें जब वी मेट वाला जादू नहीं है। बॉक्स ऑफिस पर लव आज कल का जादू अब फिल्म के संगीत और उसके प्रचार प्रसार पर ही टिका है।
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Comments
Rajat Prakash
Monday, 3rd Aug 2009, 8:43
Haan mein apke vichaar se sehmat hoon. Yeh film ek tarah se average movie hai. isme jab we met wala jadoo nahi hai.
jhon
Monday, 10th Aug 2009, 16:46
now you cahnge your mind and refarse your word about the movie, becoz this is the 2009 bigest hit all over india, and oversease, poeple want to see some changes in thinking and views, and the human nature is the same all over the world only costoms are diifferent, well now evry body appreciating imtiyaz, saif his new commer.....so enjoy the movie .................jhon and think twise.............take acre.
arshad
Monday, 10th Aug 2009, 16:52
RAJESH YADAV Friday, July 31, 2009 19:30 [IST] your word make you wrong about love aaj kal dont feel shame its happen when, people give surprise to critic, its a watchfull movie only depend on test of people, your is different, its all most hit in the hole india and oversease. advise to write something with creativity and be nutral.............take care.



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