बेगम अख्तर बीसवीं सदी के भारतीय शाीय संगीत का एक ऐसा नाम हैं, जो अपने आप में संगीत का पर्याय बन गई थीं। अख्तरीबाई फैजाबादी, जो बाद में बेगम अख्तर के नाम से संगीत की दुनिया में मशहूर हुईं।
बेगम अख्तर पर अब तक बहुत कुछ लिखा जा चुका है। उनकी जीवनी और संगीत से लेकर उन पर संस्मरणों की भी भरमार है। इस कड़ी में एक और नाम जुड़ गया है एस कालिदास की नई किताब बेगम अख्तर : लव्स ओन वॉइस का।
कह सकते हैं कि बेगम अख्तर : लव्स ओन वॉइस उनकी एक मुख्तसर सी जीवनी है। लेकिन सिर्फ शब्दों में बयां की गई उनकी कहानी ही नहीं, बल्कि समाज में तिरस्कृत और असम्मान की नजर से देखे जाने वाले एक परिवार से ताल्लुक रखने वाली एक तवायफ, संगीत को अपना जीवन समझने वाली एक लीजेंड, लखनऊ के बैरिस्टर इश्तिआक अहमद अब्बासी से विवाह करने का साहस करने वाली एक ी और पूरे जोश और ठसक के साथ अपनी शर्तो पर अपना जीवन जीने वाली बेगम अख्तर के जीवन की कई परतों पर से यह किताब पर्दा उठाती है और कई अनदेखे, अनजाने कोनों पर निगाह डालती है।
उत्तर प्रदेश के बेहद सामंती माहौल में एक ी, जो सौंदर्य के परंपरागत पैमानों के हिसाब से कतई सुंदर नहीं थी, आखिर उसके व्यकितत्व में ऐसा क्या खास था, जिसे मिटाया नहीं जा सका और जिसने उसे एक कभी न भुलाया जा सकने वाला नाम बना दिया।
एस कालिदास की खोज भी यही है। वह बेगम अख्तर की जिंदगी से जुड़े उन पन्नों को खोजने की फिराक में जिनसे मिलकर उनका अनूठा व्यक्तित्व बना है, यादों की पुरानी गलियों में भी लेकर जाते हैं। १६ साल की नाजुक लड़की के एक परिवक्व पौढ़ शाीय संगीत का अवतार बनने की यात्रा शब्दों के साथ-साथ चित्रों के माध्यम से भी व्यक्त हुई है।