आपके दोस्त तो बहुत से होंगे, हैं न! उनसे कभी-कभी आप कुट्टी कर लेते होंगे और कभी दोस्ती । इनके अलावा आपके कुछ ऐसे भी दोस्त हैं, जिनसे आपकी मित्रता तो है, पर इनके बारे में आप Êयादा जानते नहीं हैं। ये दोस्त हैं - पेड़-पौधे। आप इनसे कुट्टी करें या दोस्ती, ये आपसे सदा मित्रता ही निभाएंगे..
पे ड़-पौधे हमेशा आपको कुछ न कुछ देते रहते हैं। आम, जामुन, संतरा, केले जैसे फल इन्हीं से मिलते हैं। हरी-हरी सब्Êाी भी पौधे ही देते हैं।
इसके अलावा गेहूं, चावल, दाल, मटर, चना, जैसी चीÊों भी आपको छोटे-छोटे पेड़-पौधों से ही तो मिलती हैं! क्या आप बता सकते हैं - आपको चीनी और चाय की पत्ती कौन देता है? एक पौधा होता है गन्ने का। इसका रस भी आपने गर्मी के दिनों में खूब पिया होगा। गन्ने का रस मीठा-मीठा होता था न। इसी से चीनी बनती है।
बात रही चाय की पत्ती की, तो छोटा-सा एक ऐसा पौधा होता है, जिसकी पत्तियां तोड़कर सुखाई जाती हैं। यही होती हैं चाय की पत्तियां।
आपके घर के सामने मैदान पर (लॉन) पर छोटे-छोटे पौधे होते हैं, जिन्हें ‘दूब’ कहते हैं। दूब पर बैठना कितना अच्छा लगता है। अच्छा मित्रो! एक बात बताओ पेड़ों पर आपने झूले पड़े देखे हैं? इन झूलों में ये जो बड़े-बड़े पटरे हैं, जिन पर बैठकर आप झूला झूलते हैं, बताओ तो ये पटरे कहां से मिलते हैं? यह पटरे भी हमें पेड़ों से ही मिलते हैं।
जिस रस्सी से झूला पड़ता है, वह भी नारियल की जटा से बनी है। आपने नारियल तो देखा है न, यह एक बड़ा फल होता है, इस पर ढेर सारी जटाएं होती हैं। जब हम जटा अलग करके इस फल तो तोड़ते हैं, तो अंदर से हमें गिरी मिलती है। मीठी-मीठी गिरी आपने खाई है कि नहीं! ठंडी-ठंडी हवा पेड़-पौधों के हिलने से ही चलती है। यह पेड़-पौधे हमें साफ और अच्छी हवा देते हैं, जिसमें हम सांस लेते हैं।
मित्रो! घर में रखे जाने वाले मेज, कुर्सी, पलंग यह सब पेड़ों से ही बनते हैं। आपका छोटा भैया जिस पालने पर लेटा रहता है, वह भी तो पेड़ों से ही बना है। घर का दरवाÊा, खिड़की सभी पेड़ों की लकड़ी से बनी है।
आपके दादा-नाना जिस छड़ी को लेकर चलते हैं, वह छड़ी भी पेड़ का एक हिस्सा है।
आपको याद होगा जब आप बहुत छोटे से थे, तो एक लकड़ी की गाड़ी पकड़कर चलते थे, वह भी तो पेड़ों से ही बनी होती थी। इन्हीं पेड़-पौधों से ढेर सारी दवाएं बनती हैं, जो हमारे बहुत काम आती हैं। आपके स्कूल के बस्ते में स्केल पटरी और रबर भी पेड़-पौधों से ही बने हैं।
जिस रिक्शे या ट्रॉली पर बैठकर आप स्कूल जाते हैं, वह भी तो लकड़ी की बनी है और यह लकड़ी पेड़-पौधों से ही मिलती है। कभी-कभी आपको पालक या चौराई का साग खाने को मिलता होगा, इनके छोटे-छोटे पौधे होते हैं, जिनसे ये पत्ते मिलते हैं।
अब आप ही बताएं इन पेड़-पौधों से आप दोस्ती करना चाहेंगे या कुट्टी। इनके संग दोस्ती करने में फायदा ही फायदा है। अच्छा एक बात बताओ, आम, जामुन, इमली जैसे पेड़ों में जब फल लगे होते हैं और लोग पत्थर मारकर फलों को तोड़ते हैं, तो यह पेड़ भी पत्थर क्यों नहीं मारते?
ये तो मारने वाले को खाने को फल दे देते हैं। सच तो यह है कि ये पेड़ हमें सिखाते हैं कि अगर कोई आपसे कुट्टी भी करना चाहे, तो आप उससे दोस्ती रखें और उसके साथ अच्छा व्यवहार करें। पेड़-पौधे हमारे सच्चे दोस्त हैं, जो हमेशा हमारी भलाई करते हैं, हमें फायदा पहुंचाते हैं।
रमाशंकर चंचल, इलाहाबाद, उप्र