नई दिल्ली. इमरजेंसी के दौरान खौफ का पर्याय बन चुकी नसबंदी अब भारतीय पुरुष में धीरे-धीरे स्वीकार्य होती जा रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के रिकॉर्ड से पता चलता है कि नसबंदी कराने वाले पुरुषों की संख्या 2006-07 में 1,22,735 थी जो 2008-09 में बढ़कर 2,68,883 हो गई। पुरुषों और महिलाओं के वंध्यकरण में नसबंदी का अनुपात 2006-07 के 2.5 फीसदी की तुलना में 2008-09 में बढ़कर 5.5 फीसदी हो गया है। यह अनुपात 30 वर्षो में सबसे बेहतर है।
रिकॉर्ड से पता चलता है कि 11 राज्यों ने नई प्रकार की नसबंदी (एनएसवी) को बढ़ावा देने में सराहनीय योगदान दिया है। यह तरीका कम पीड़ादायक और तुरंत असर दिखाने वाला है। इस दिशा में बेहतरीन काम करने वाले राज्य हैं- महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गोवा, गुजरात, झारखंड, मध्यप्रदेश, दिल्ली, सिक्किम, पंजाब, हिमाचलप्रदेश और जम्मू-कश्मीर। नसबंदी कराने वाले लोगों की तादाद में पिछले तीन वर्र्षो में वृद्धि विशेष सरकारी कार्यक्रमों तथा समझाइश के बेहतरीन तरीकों का नतीजा है।