भारत का विभाजन बीसवीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण घटना थी, जिसके विध्वंसक असर से हम आज तक नहीं उबर सके हैं। सिर्फ सैद्धांतिक ही नहीं, बल्कि यह दोनों देशों के सांस्कृतिक इतिहास की खोहों में जाती है।
पुस्तकः द ग्रेट डिवाइड : इंडिया एंड पाकिस्तान
प्रकाशकः हार्पर कॉलिंस
मूल्यः 495 रुपए
भारत और पाकिस्तान के बीच शांति के सारे प्रयासों के बावजूद बीच-बीच में तकरार और मतभेद के तीखे कांटें उग ही आते हैं। कारगिल युद्ध को अभी सिर्फ १क् वर्ष बीते हैं। जब हम आतंक और भय के साए में जीते हैं तो एक बार इतिहास में लौटकर उन पन्नों को खंगालने की जरूरत महसूस होती है, जिन पर टनों धूल जमी हुई है। ऐसी ही एक कोशिश है इरा पांडेय के संपादन में प्रकाशित किताब ‘द ग्रेट डिवाइड : इंडिया एंड पाकिस्तान।’
भारत का विभाजन बीसवीं सदी की पूरे एशिया महाद्वीप की सबसे महत्वपूर्ण घटना थी, जिसके विध्वंसक असर से हम आज तक नहीं उबर सके हैं। विभाजन पर काफी पन्ने रंगे जा चुके हैं, काफी स्याही उड़ेली गई है, लेकिन यह किताब कई अर्थो में पहले के उन तमाम प्रयासों से भिन्न है।
इस किताब में पहली बार सीमा के दोनों ओर बसे लेखकों और इतिहासकारों ने उस ऐतिहासिक परिघटना के कारणों और परिणामों की पड़ताल करने की कोशिश की है। अपने संपादकीय में इरा पांडेय कहती हैं कि इस किताब में ठोस और मुश्किल बौद्धिक विषयों जैसे राजनीति, अर्थशास्त्र, कूटनीति, धर्म इत्यादि और दोनों देशों की संस्कृतियों से जुड़े कुछ नाजुक और भावुक विषयों जैसे संगीत, कला, भाषा, क्रिकेट और सिनेमा इत्यादि के बीच एक संतुलन है।
किताब इन देशों के सांस्कृतिक इतिहास के खोहों में भी जाती है। यह बहुत रूढ़ अर्थो में सिर्फ राजनीतिक-सैद्धांतिक विश्लेषण भर नहीं है। दोनों देशों की संस्कृति एक है और वहां की भाषाएं, कलाएं और यहां तक कि कई नदियों का उद्गम भी एक है। इस एक परंपरा को क्या कोई कागज का टुकड़ा या कोई एक लकीर बांट सकती है? किताब कई अज्ञात सच उजागर करती है।