मेरे लिए सब दुआ करें..
सुनील कुकरेती Monday, August 10, 2009 16:05 [IST]  

कामयाबी के दौर में गोविंदा ‘नंबर वन’ थे। उसी रुतबे को हासिल करने के लिए वे ‘पार्टनर’ के साथ चिपक रहे हैं। राजनीति की राह पर रपट जाने वाले गोविंदा अब बॉलीवुड में सिक्का जमाने की कोशिश कर रहे हैं..



भागमभाग और ‘पार्टनर’ की कामयाबी के साथ हरफ़नमौला गोविंदा एक बार फिर दर्शकों की तवज्जो हासिल करने लगे हैं। इस क्रम में निर्माता अब्बास-मस्तान और निर्देशक रूमी जाफ़री की फिल्म ‘लाइफ़ पार्टनर’ में दर्शक गोविंदा की फ़नकारी का आनंद ले सकते हैं। इस फिल्म और भविष्य की योजनाओं को लेकर गोविंदा से मुलाक़ात हुई, तो वे काफ़ी चुस्त-दुरुस्त नज़र आए। पेश हैं, बातचीत के ख़ास हिस्से-



इस फिल्म और अपने किरदार के बारे में बताइए?



रोमांटिक कॉमेडी है। इसमें मैं एक वकील जीत ओबेराय का चरित्र निभा रहा हूं। वह तलाक़ चाहने वाले जोड़ों की इच्छा पूरी करता रहता है।



‘पार्टनर’ के बाद आपकी इस फिल्म के टाइटल में भी ‘पार्टनर’ शब्द आ रहा है, क्या ‘नंबर वन’ की तरह इसका भी टैग आप पर लगने जा रहा है?



आप भी दुआ कीजिए.. अगर कामयाबी के साथ वह टैग लगता है, तो इससे बढ़िया बात और क्या होगी?



आपने अपना लाइफ़ पार्टनर किस तरह चुना?



प्यार तो हुआ था सुनीता जी (पत्नी) से, पर मां की दुआओं से यह शादी हुई है। मां ने सुनीता को पसंद किया था। आज उन्हीं की कृपा से मेरी घर-गृहस्थी सही चल रही है। ढंग की परवरिश के साथ बच्चे बड़े हो गए हैं। मैं अपने आपको ख़ुशनसीब मानता हूं कि अपनी लाइफ़ पार्टनर के बारे में मुझे नहीं सोचना पड़ा।



जो लोग प्रेम विवाह करते हैं, उनके बारे में क्या कहेंगे?



इस बारे में मैं ज्यादा प्रवचन नहीं देना चाहता। आज तो क़िस्म-क़िस्म की शादियां हो रही हैं। फाइनली यह कह सकता हूं कि जहां प्यार बना रहता है, वहीं सही शादी है।



इस तरह की ख़बर उड़ी कि इस फिल्म में आपके अपोजिट कैटरीना को लिया जा रहा था, पर उन्होंने फिल्म करने से मना कर दिया और तब अमृता राव आईं?



मैं कैटरीना जी के साथ ‘पार्टनर’ कर चुका हूं। बड़ी सुलझी लड़की हैं वे। अमृता राव बड़ी अच्छी कलाकार हैं। सलमान मेरे बड़े अच्छे दोस्त और पार्टनर हैं। इसलिए कैटरीना मेरे घर की लड़की है। बाक़ी रही गॉसिप की बात, तो मैं यही कहना चाहूंगा कि मैं दुनिया की हर चीज़ को सहन कर सकता हूं, पर किसी गॉसिप को नहीं कर सकता।



आप ‘लाइफ़ पार्टनर’ में तलाक़ करवा रहे हैं। इस बार आपको लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिला। तो राजनीति से आपका तलाक़ हो गया है या मनमुटाव चल रहा है?



कुछ लोग कड़वाहट लेकर जीते हैं। मैं उन लोगों में से हूं, जो तलाक़ के बाद भी मधुर संबंध बनाए रखते हैं। राजनेता की दि़क्क़त यह होती है कि वादा तो उसे अकेले करना पड़ता है, पर जब उसे पूरा करने की बात आती है, तो कई लोगों से वे बातें मनवानी पड़ती हैं, तब जाकर कोई वादा पूरा हो पाता है। फिर भी मैंने अपने कार्यकाल में जो वादे किए, उनमें से लगभग सभी पूरे किए। अच्छा ही अनुभव रहा। मैंने काफ़ी कुछ सीखा।

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